गांधी कथा ---- गांधी जी कुछ समय के लिए साउथ अफ्रीका से भारत आये ------ १८९६ के मध्य में गांधी जी ने भारत आकर दक्छिन अफ्रीका में भारतीयों की स्थिति पर प्रकाश डालने के लिए एक पुश्तिका लिखी और हिंदुस्तानी नेताओं के दर्शन भी किये !मुंबई में बे फीरोज शाह मेहता ,बदरुद्दीन तैयबजी ,महादेव गोविन्द रानाडे,अदि से पूना में लोकमान्य तिलक ,प्रोफेसर भण्डार कर ,गोपालकृष्ण गोखले ,आदि से भी मिले 1मुम्बई से आरम्भ करके ,पुणे, और मद्रास में उन्होंने भासण भी दिए !मद्रास में गांधी जी ने जस्टिस सुब्रामणियम ,श्री आनंद चारलु और हिन्दू के सम्पादक श्री परमेश्वरम ,प्रख्यात वकील भाष्यम् आयंगर और श्री मार्टिन अदि से भी मिले !मद्रास से गांधीजी कोलकत्ता गए वहां बे सुरेंद्रनाथ बनर्जी ,महाराजा ज्योतीन्द्र मोहन टैगोर इंग्लिश मैन के सम्पादक सांडस ,आदि से भी मिले !भारत में गांधी जी ने जो सभाएं की उसके समाचार दक्छिन अफ्रीका में भी पहुंचे ! गांधी जी के सभाओं में दिए गए भसणो के अतिश्योकत पूर्ण तोड़े मरोड़े अंश गोरों ने भी पढ़े बे गांधीजी पर आग बबूला हो गए !इसी बीच गांधीजी को नेटाल से तार मिला कि तुरंत आइए !गांधी जी ने समझा कि हिन्दुस्तानियों के विरुद्ध कोई ना कोई नया आंदोलन गोरों ने शुरू कर दिया होगा ! इसीलिए कलकत्ता का कार्य बिना पूरा किये ही गांधी जी अपने परिवार के साथ लौट पड़े और कुरलैंड नामक पानी के जहाज पर सबर हो गए `!इस जहाज से तुरंत रबाना होने के बाद उसी दिन एशियन कंपनी का एक जहाज नादरी भी बम्बई से नेटाल के लिए रबाना हुआ !दोनों जहाज़ों में दक्छिन अफ्रीका जाने वाले लगभग ८०० मुसाफिर सबार थे
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