Sunday, 12 June 2016

१---विषय भोगों की आसक्ति का जो  त्याग है ,वही वास्तविक  त्याग है !राग द्वेष से रहित होने पर ही त्याग की सिद्धि होती है, अन्यथा नहीं !
२----जो मनुष्य अपने को प्रगट ना करके प्रयत्न पूर्वक प्राणियों की भलाई का  काम  करता रहता है ,उसके उस श्रेष्ठ भाव और आचरण कानाम ही आर्यता है ! यह आसक्ति के त्याग से प्राप्त होती है !

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