Saturday, 11 June 2016

गांधी कथा ---साउथ अफ्रीका में हिन्दुस्तानियों का आगमन ----अंग्रेजों को नेटाल में बड़े पैमाने पर गन्ना ,चाय ,और काफी का उत्पादन करने के लिए मजदूरों की जरुरत थी ! इसीलिए उन्होंने भारत की ब्रिटिश सरकार के साथ पत्र व्योहार किया और मजदूरों की पूर्ति के लिए सहायता मांगी भारत सरकार ने नेटाल की मांग स्वीकार की और इसके परिणाम स्वरुप हिंदुस्तानी मजदूरों का पहला जहाज १६ नवम्बर १८६० को नेटाल पहुंचा ! ये हिन्दुस्तानी मजदूर नेटाल में एग्रीमेंट पर गए हुए मजदूरों के नाम से पहचाने जाते थे इस पर से ये मजदूर अपने आपको गिरमिटिया कहने लगे ! और इसी नाम से पुकारे जाने लगे ! जब नेटाल में गिरमिटियों के जाने के समाचार मौरीसस  में फैले तो भारत के व्योपारी नेटाल जाने को ललचाये ! मौरीसस भारत और नेटाल के बीच में पड़ता है ! मौरीसस द्वीप में हजारों हिन्दुस्तानी व्योपारी और मजदूर रहते हैं उनमें से एक व्योपारी अबूबकर आमद ने अपना व्यापार खोलने का विचार किया अबूबकर ने नेटाल में व्यापार शुरू किया जमीनें खरीदी उनकी बहुत बड़ी कमाई की ख़बरें हिंदुस्तान में उनके वतन पोरबंदर तथा उसके आस पास के छेत्रों में फैली ! परिणाम स्वरुप दूसरे मुसलमान भी नेटाल पहुंचे ! इन व्यापारियों को मुनीमों की जरुरत थी इसीलिए गुजरात और कठिया बाड़ से हिन्दू मुनीम भी नेटाल पहुंचे !इस प्रकार से नेटाल में दो बर्ग के हिन्दुस्तानी हो गए ---- १-- स्वतंत्र व्योपारी और उनका स्वतंत्र नौकर बर्ग २--गिरमिटिया हिन्दुस्तानी !  गिरमिटिया मजदूर ५ साल के एग्रीमेंट पर नेटाल जाते थे ! पांच साल बीत जाने के बादवहां मजदूरी करने को बे बंधे नहीं थे ! एग्रीमेंट पूरा होने के बाद स्वतंत्र मजदूरी या व्यापार करना हो तो बेसा करने का और नेटाल में स्थायी रूप सेबसना हो तो वहां बसने का अधिकार उनको था 1 कुछ लोगों ने इस अधिकार का उपयोग किया और कुछ लोग हिन्दुस्तान लौट गए  ! जो हिन्दुस्तानी नेटाल में रह गए बे फ्री इंडियन  के नाम से पुकारे जाने लगे, किन्तु इन गिरमिट से मुक्त हिन्दुस्तानियों और स्वतंत्र हिन्दुस्तानियों में बहुत बढ़ा फर्क था ! गिरमिट मुक्त हिन्दुस्तानियों को एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए परवाना लेना पड़ता था, इन गिरमिट मुक्त हिन्दुस्तानियो पर और भी बहुत से कड़े कानून लागू थे ! नेटाल में उस समय पूर्ण स्वतंत्र हिन्दुस्तानियों की संख्या ४० से ५० हजार  के बीच और गिरमिट मुक्त हिन्दुस्तानियों तथा उनकी संतानो की संख्या लगभग एक लाख थी !     

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