महारानी लक्ष्मीबाई का स्मरण बहुत उत्साहपूर्वक किया जा रहा है !दीप दान
किया जा रहा है !श्रद्धांजलि सभाएं भी आयोजित की जा रही हैं ! और लेख भी
समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रहे हैं !यह सब भी जरूरी है ! और ठीक हो रहा
है !किन्तु मात्र इतने से ही रानी लक्ष्मीबाई के प्रति श्रद्धा सुमन
अर्पित करने का उत्तर्दायित्वव पूर्ण नहीं होता है !महारानी के शौर्य और
त्याग का प्रयोग हमें बर्तमान जीवन में व्याप्त बुराइओं के विरुद्ध संघर्ष
करने में भी लगाना चाहिए !क्योंकि श्रद्धाजंलि अर्पित करने वाले
आयोजकों और भासण देने वाले लोगों में ऐसे लोगों का बाहुल्य होता है !जिनकी
दिलचस्पी सिर्फ भासण देने में और आयोजन करने में ही होती है ! !दुर्भाग्य
से ऐसे लेख भी समाचार पत्रों में प्रकाशित हो जाते हैं !जिनमे सही तथ्यों
का अभाव होता है !आज ऐसे युवाओं की आवश्यकता है !जो रानी के त्याग बलिदान
और झाँसी के प्रति अपने असीमित प्रेम का उदाहरण अपने कार्यों से प्रस्तुत
करें !झाँसी में जो रिश्वतखोरी है उसके बिरुद्ध कानून का प्रयोग करें !जो
खनिज पदार्थों बालू गिट्टी मिटटी आदि का अवैध कारोबार चल रहा है उसकी तरफ
शासन प्रशाशन का ध्यान आकर्षित करें ब्रकछारोपण करें !सरकारी स्कूलों में
अध्यापक पढ़ाने नहीं जाते हैं इसके लिए अभिभावकों को जागरूक करें और ऐसे
अध्यापकों की शिकायतें अधिकारियों तक पहुंचाएं ! जो सड़कें बनती है बे बनते
ही टूट जाती हैं !ऐसे सभी रचनात्मक कार्य जिस से महारानी की स्मृति अमर हो
जाए और जब अगली जयंती आये तो झाँसी महारानी के त्याग और बलिदान की जीवित
यादगार बन जाय !और श्रद्धांजलि सभाएं और दीपदान आदि कार्यक्रम यथार्थ रूप
से जन्म दिन पर वास्तविक उत्साह पैदा करने वाले बन जाएँ !
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