Monday, 20 June 2016

अन्तर राष्ट्रीय योग दिवस ------ आज भारत सहित कुछ देशों में कुछ लोग  आसन ,प्राणायाम आदि को योग समझ और मानकर बही रंग योग को  योग दिवस के रूप में मना रहे हैं !  ! भारत में प्रधान मंत्री सहित अनेक केंद्रीय मंत्री तथा  ,भाजपा शासित राज्यों में भी यह बहि रंग  योग राज्य सरकारों के संरक्छण मैं  सामूहिक रूप से मनाया जा रहा है ! इस बहिरंग योग को योग  का स्वरुप प्रदान कर राजनैतिक ,आर्थिक और सम्मान प्राप्त करने वाले योग गुरु के नाम से ख्याति प्राप्त कुछ बहिरंग योग में निष्णात तथा कथित साधु संत भी इस बहिरंग योग के माध्यम से आसन प्राणायाम आदि का सार्वजानिक प्रदर्शन कर रहे हैं !बहिरंग योग निश्चित तौर पर अनियमित भोग विलास से युक्त जीवन जीने वाले शोषण और अनीति से धन उपार्जन कर कर्त्तव्य भ्रष्ट ,आराम तलब लोगों को स्वास्थ्य प्रदान करने का बहुत ही लाभ दायक साधन है ! किन्तु मेहनत कस अधभूखे शोषित किसानों ,मजदूरों ,और कर्त्तव्य निष्ठ लोगों और सच्चे तपोनिष्ठ योगियों ,सन्यासियों  ,और साधु संतों को यह बिलकुल उपयोगी नहीं है !क्योंकि इस बहि रंग  योग से योग के मूल तत्त्व परमात्मा की प्राप्ति नही होती है ! योग से परमात्मा की प्राप्ति के मार्ग में योगियों ने ५ दोष काम ,क्रोध ,लोभ ,भय और अति निद्रा  बताये हैं !योगी क्रोध को मनोनिग्रह के द्वारा  काम को संकल्पों के त्याग के द्वारा तथा सतोगुण के आचरण  से अति निद्रा ,प्रमाद और आलस्य का नाश करता है !योगी धैर्य का सहारा लेकर लिंग और उदर की रक्छा करता है अर्थात स्त्री संग और भोजन की चिंता दूर कर देता है ! और सत्कर्मों के द्वारा मन और वाणी की रक्छा करता है अर्थात इनको शुद्ध बनाताहै ! सावधानी से भय का और विद्वानों के सत्संग से दम्भ ,पाखण्ड और झूठ का त्याग करताहै !इस प्रकार सदैव सावधानी पूर्वक आलस्य ,और प्रमाद त्याग कर इन योग सम्बन्धी दोषों को जीतने का प्रयत्न करता है !ध्यान ,गीता आदि सत शास्त्रों के अध्यन ,चिंतन ,मनन, दान ,सत्य ,लज्जा ,सरलता ,छमा ,शौच ,आचार शुद्धि तथा इंद्रियों के संयम से तेज की बृद्धि होती है 1 और शोषण ,अनैतिक साधनों से सत्ता ,संपत्ति ,प्राप्त करने की प्रवृत्ति और शोषण करने के दुष्ट आचरण  और स्वभाव  तथा इन अमानवीय अत्यन्त निकृष्ट कर्मों के से बिरति हो जाने के कारण पाप करने की प्रबृत्ति का नाश हो जाताहै !इस प्रकार आसन प्राणायाम आदि बहिरंग योग से उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है ! और योग के काम ,क्रोध आदि दोषों  के  निवारण से उत्तम आचरण की प्राप्ति होती है !ये बहिरंग और अंतरंग दोनों योग मिलकर सम्पूर्ण योग का निर्माण करते हैं !

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