गांधी कथा ---- को जाने कल की? -------जिस मुकदद्मे को लड़ने के लिए गांधीजी साउथ अफ्रीका गए थे वह ख़त्म हो गया था इसिलए अब उन्होंने स्वदेश लौटने की तैयारी शुरू की ! उनके मुबबकिल अब्दुल्ला सेठ ने गांधीजी के सम्मान में सिडन्हम में सामुदायिक भोज का आयोजन किया ! गांधी जी ने पूरा दिन वहीं बिताया !जब गांधीजी अखबार पढ़ रहे थे तो उनकी नजर एक समाचार पर पड़ी जिसका शीर्षक था इंडियन फ्रेंचाइज यानी हिन्दुस्तानी मताधिकार ---- इस समाचार का आशय यह था कि हिन्दुस्तानियों को नेटाल की धारा सभा के लिए सदस्य चुनने का अधिकार समाप्त कर दिया जाय ! भोज में सम्मिलित किसी को भी हिन्दुस्तानियों के मताधिकार को समाप्त करने वाले इस बिल के बारे में कुछ भी पता नहीं था ! गांधीजी ने जब इस बिल के बारे में लोगों से पूंछा तो उन्होंने कहा हम व्योपारी लोग हैं हमलोग तो सिर्फ अखबार में व्यापार सम्बन्धी समाचार ही पढ़ते हैं ! हम लोग अंग्रेजी पढ़ना भी नहीं जानते हैं ! गांधीजी ने कहा की जो लोग यहीं पैदा हुए हैं और अंग्रेजी पढ़े हुए हैं बे हिन्दुस्तानी युवक यहाँ क्या करते हैं ?अब्दुल्ला सेठ ने कहा बे हमारे पास नहीं फटकते हैं बे ईसाई हैं इसीलिए पादरियों के प्रभाव में हैं और पादरी सभी गोरे हैं जो सरकार के अधीन हैं ! गांधीजी की ऑंखें खुल गयी ! भारतीय समाज को अपना कर इनके अधिकारों के लिए संघर्ष करना चाहिए ! ये ईसाई हैं इससे क्या बे हिन्दुस्तानी नहीं रहे ? और परदेसी बन गए हैं ?भोज में मौजूद सभी लोग इस बात चीत को सुन रहे थे ! उन लोगों ने गांधीजी से कहा की अगर आप एकाध महीना और रुक जाएँ तो आप जिस तरह कहेंगे हम लड़ेंगे आपकी जो फीस होगी वह हम लोग आपको देंगे ! गांधीजी को यह सुनकर दुःख हुआ उन्होंने कहा सार्वजानिक सेवा की कोई फीस नहीं होती है ! में सिर्फ एक सेवक के रूप में ठहर सकता हूँ आपको मुझे फीस के रूप में कुछ भी नहीं देना होगा ! आपको सिर्फ जो खर्चा इस काम में आएगा उसकी व्यबस्था करनी होगी 1 सभी लोगों ने कहा हमलोग खर्चे की व्यबस्था करेंगे आप सिर्फ रहना स्वीकार कर लें ! गांधीजी ने अपनी लड़ाई की रूप रेखा तैयार कर ली ! इस प्रकार ईश्वर ने साउथ अफ्रीका में गांधीजी के स्थायी निवास की नींव डाली और हिन्दुस्तानियो के स्वाभिमान के संघर्ष का बीजा रोपण किया
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