Wednesday, 8 June 2016

शीतलता ,रस,गीला करना ,पिघलना ,चिकनाहट ,सौम्य भाव जिभ्या ,टपकना ,ओले या बर्फ के रूप में जम जाना पृथ्वी से उत्पन्न होने वाले चावल ,दाल ,सब्जी अदि को गला देना ---ये सब जल के गुण हैं!
२--भयानक रूप ग्रहण करना ,जलना ,ताप देना ,पकाना ,प्रकाश करना ,शोक ,राग ,हल्कापन ,तीकछनता,और आग की लपटों का सदा ऊपर की और उठना तथा प्रकाशित होना -----ये सब अग्नि के गुण हैं !
३---अनियत स्पर्श ,वाणी की स्थिति ,चलने फिरने अदि की स्वतंत्रता ,बल ,शीघ्र गामिता .मलमूत्र अदि शरीर से बाहर निकालना ,उत्पेछन् आदि कर्म क्रिया शक्ति ,प्राण और जन्म ,मृत्यु ----ये सब वायु के गुण हैं
४---शव्द ,व्यापकता ,किसी स्थूल पदार्थ के आश्रित ना होना ,स्वयं प्रभूत  औरकिसी दूसरे आधार पर ना रहना ,अव्यक्तता  ,निर्विकारिता ,प्रतिघात शून्यता और श्रवण इंद्रिय का कारण होना और विकृति से मुक्त होना ---ये सब आकाश के गुण हैं
५----स्थिरता ,भारीपन ,,कड़ापन ,बीज को अंकुरित करने की शक्ति ,गंध ,विशालता ,शक्ति ,संघात ,स्थापना और धारण करने की शक्ति ----ये दस पृथ्वी के गुण हैं !  ,     
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