गांधी कथा ------दक्छिन अफ्रीका गए -------१० जून १८९१ में गांधीजी ने इनर टेम्पल ऑफ़ लॉ लंदन से बैरिस्टर की डिग्री प्राप्त की !और अप्रैल १८९३ में बे पोरबंदर गुजरात की फर्म जिसका व्यापार दक्छिन अफ्रीका में था उसके वकील के रूप में दक्छिन अफ्रीका के लिए मुंबई से समुद्री जहाज से प्रस्थान किया ! उस समय गांधी जी की आयु २४ साल की थी !अफ्रीका संसार के बड़े से बड़े महाद्वीपों में से एक है ! भारत भी महाद्वीप जैसा देश माना जाता है परन्तु अफ्रीका के भू भाग में से केवल छेत्रफल की दृष्टि से ४ या ५ भारत बन सकते हैं !गांधीजी मई के अंत में नेटाल पहुंचे ! नेटाल के बंदरगाह को डरबन भी कहा जाता था ! गांधीजी को लेने के लिए उनके मुब्बकिल अब्दुल्ला सेठ बंदरगाह पर आये थे ! गांधी जी उस समय फ्राक कोट ,पैंटलून और सर पर बंगाली ढंग की पगड़ी पहने हुए थे ! दक्छिन अफ्रीका में रहने वाले सभी भारतीयों को कुली कहा जाता था ! इसीलिए गांधीजी को भी कुली बैरिस्टर कहा जाता था ! व्योपारी कुली व्योपारी कहलाते थे ! सभी भारतीय इस अपमान को बर्दास्त करते थे ! अब्दुल्ला सेठ गांधीजी को डरबन की एक अदालत दिखाने लेगएऔर कुछ जान पहचान कराई ! वहां पर गांधीजी अब्दुल्ला सेठ के अंग्रेज वकील के पास बैठ गए ! मजिस्ट्रेट गांधीजी को बार बार देख रहा था ! उसने गांधीजी से पगड़ी उतारने को कहा गांधीजी ने पगड़ी उतरने से मना कर दिया और अदालत से बाहर चले गए 1 गांधी जी की दक्छिन अफ्रीका में लड़ाई की शुरुआत इसी प्रकरण से हो गयी थी ! यह पगड़ी की घटना समाचार पत्रों में विस्तार से प्रकाशित हुई ! अखबारों में इस घटना को अन्वेलकम विजिटर ----- अबांछित अतिथि के शीर्षकोिं के रूप में प्रकाशित किया गया 1तीन ,चार दिनों के अंदर ही गांधीजी दक्छिन अफ्रीका में प्रसिद्ध हो गए ! अखबारों में कुछ लोगों ने गांधी जी का पक्छ लिया और कुछ ने गांधीजी की धृष्टता की कड़ी निंदा भी की !
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