Wednesday, 15 June 2016

१--मान और मौन सदा एक साथ नहीं  रहते !क्योँकि मान से संसार में सुख मिलता है और मौन से आतंरिक आत्मानन्द की प्राप्ति होती है  !जो मान से कभी भी प्राप्त नहीं हो सकता है !इस तथ्य को ग्यानी जन जानते ,और समझते हैं ! इसीलिए बे मान प्राप्ति के लिए ना लालायित होते हैं और न भटकते हैं !
२---कोई काम देखने में छोटा होने पर भी यदि उसमें सार अधिक हो तो वह महान ही है ! ना करने की अपेक्छा कुछ उत्तम कर्म करना ही श्रेष्ठ है ! क्योँकि कर्तव्य कर्म ना करने वाले से बढ़कर दूसरा कोई पापी नहीं है !

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