जब तक मनुष्यों के दिल दिमाग और दिनचर्या में भौतिक सुखों की प्राप्ति की
इक्छा आकांछा महत्ता प्रभावी रहेगी तब तक बे वास्तविक योगी नहीं हो सकते
हैं !फिर भी भारत भूमि में जन्म लेने बाली विश्व कल्याण कारी योग विद्या
को सामान्य मनुष्यों तक पहुंचाने का प्रयत्न किया जा रहा है ! यह अत्यंत
प्रसंसनीय कार्य है !यह सरकार द्वारा किया जा रहा है इसीलिए इसमें राजनैतिक
लाभ लेने का प्रयत्न भी छिपा हुआ है ! !भौतिक सुखों की प्राप्ति की
आकच्छओं ने मनुष्य को दानव बना दिया है !बाजार नकली मिलाबटी
खाद्द्य पदार्थों से भरे पड़े हैं !डॉक्टर वकील अध्यापक अधिकारी कर्मचारी
सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए सामाजिक सेवा का स्वरुप समाप्त करने
में लगे हुए हैं !धर्म से भगवान गायब हो गए हैं !और भगवान के स्थान पर
गुरु कथावाचक साधु तथाकथित सन्यासी और मठा धीस ही भगवान बनकर अपनी पूजा
अर्चा करा रहे हैं! ! कुछ लोग योग का पुरजोर विरोध भी कर रहे हैं !इसमें
बो राजनेता भी शामिल हैं जो स्वयं योग को करते हैं और योग की प्रसंसा भी
करते हैं किन्तु योग को सामान्य जनता तक नहीं पहुँचने देना चाहते हैं
!!अवांछनीय कामनाओं की तृप्ति के लिए भोग प्राप्ति का यह दृश्य दिल्ली से
देहात तक दिखाई देता है !इस भोग प्रधान जीवन ने लोगों की जिंदगी से सुख चैन
कर्तव्य निष्ठा ईमानदारी देशभक्ति आदि के कीमती जीवन में उतारने वाली
जीवन चर्या के मूल्य सिधान्तो को ही छीन लिया है !सामाजिक और पारिवारिक
जीवन नर्क बन गया है !भाई को भाई के साथ धोखा देने और बेईमानी करने में
कोई हिचक नहीं होती है !परिवार बिखर गए हैं !और परिवारों में बेईमानी और
धोखा धडी का तांडव दिखाई देता है !भारत की यह पवित्र भूमि अपने स्वाभाविक
करुणा स्नेह अहिंसा तप त्याग और निष्काम सेवा के मार्ग से बिचलित होकर
स्वार्थ के घटाटोप अन्धकार से ग्रस्त होकर दुःख और कष्ट भोग रही है !मनुष्य
के दिल दिमाग और जीवन चर्या से भौतिक सुख प्राप्ति की अवांछनीय कामवासनाओं
को निकालकर दिल दिमाग और जीवन चर्या को शुद्ध पवित्र काने का काम योग
साधना करेगी !यह योग साधना स्वस्थ शरीर में स्वस्थ दिल दिमाग का निर्माण
करेगी !
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