गांधी कथा ------ कुलीपन का अनुभव-----दक्छिन अफ्रीका के ऑरेंज फ्री स्टेट में कानून बनाकर भारतीयों के सभी अधिकार छीन लिए गए थे ! वहां हिन्दुस्तानियों को सिर्फ होटलों में बेयरों या इसी प्रकार की कोई दूसरी मजदूरी करने का ही अधिकार था 1 जो भारतीय व्योपारी थे उन्हें नाम मात्र का मुआबजा देकर निकाल दिया गया था !ट्रांसवाल में भी १८८५ में एक कड़ा कानून बना था !१८८६ में उसमें कुछ सुधार हुआ उसके फलस्वरूप यह तै हुआ की प्रत्येक भारतीय को प्रवेश फीस के रूप में तीन पोंड जमा कराने के बाद ही उनके लिए छोड़ी गयी जमीन के बे मालिक हो सकते थे ! पर यह अधिकार सिर्फ कानून के रूप में ही रहा मौके पर भारतीयों को कभी भी जमीन का अधिकार नहीं प्राप्त हुआ !भारतीयों को वोट देने का भी अधिकार नहीं था ! इसके अलावा जो कानून काळा रंग के लोगों के लिए लागू होते थे बे भी भारतीयों पर लागू होते थे ! इन कानूनों के अनुसार भारतीय लोग फुट पाथ पर नहीं चल सकते थे ! रात के ९ बजे के बाद परवाने के बिना बाहर नहीं निकल सकते थे ! गांधीजी प्रेसीडेन्ट स्ट्रीट के रास्ते एक खुले मैदान में रोज घूमने जाते थे इसी स्ट्रीट में साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति क्रूगर का घर था वह घर सब तरह के आडम्बरों से रहित था ! आस पास के दूसरे घरोंऔर राष्ट्रपति के घर में कोई फर्क नहीं मालूम पड़ता था ! घर के बाहर पहरा देने वाले संतरी को देख कर ही यह पता चलता था की यह किसी अधिकारी का घर है 1 गांधी जी हमेशा ही संतरी के पास से निकलते थे किन्तु संतरी कभी उनसे कुछ नहीं कहता था !संतरी समय समय पर बदल जाते थे ! एक बार जब गांधीजी फुट पाथ से जा रहे थे तो सिपाही ने बिना उनको फुट पाथ से उतर जाने को कहे उनको धक्का मारा,लात मारी और नीचे पटक दिया ! उसी समय मिस्टर कोट्स जो अटॉर्नी थे वहां से घोड़े पर सबार होकर निकल रहे थे उन्होंने गांधी जी को पुकारा और कहा मेने सब देखा है आप इस पर मुकदद्मा चलाएं में गबाही दूंगा मुझे इस बात का बहुत दुःख है की आप पर इस तरह का हमला किया गया ! गांधीजी ने कहा सिपाही के लिए तो सभी काले एक समान है उसका इसमें कोई दोष नहीं है ! गांधीजी ने कहा मेने तो यह नियम ही बना लिया है की मुझ पर जो बीतेगी उसके लिए में अदालत में नहीं जाऊँगा ! सिपाही डच था कोट्स ने उसको डाटा उसने गांधीजी से माफ़ी मांगी किन्तु गांधीजी तो उसे पहले ही माफ़ कर चुके थे ! किन्तु इस घटना ने गांधी जी को प्रवासी भारतीयों के प्रति होनेवाली अपमान जनक घटनाओं के प्रति और अधिक सम्बेदन शील और तीब्र बना दिया ! गांधीजी ने अनुभव किया की स्वाभिमान की रक्छा चाहने वाले भारतीयों के लिए साउथ अफ्रीका उपयुक्त देश नहीं है यह स्थिति किस प्रकार समाप्त की जा सकती है ! इसके विषय में गांधीजी का दिल दिमाग अधिक गहराई से सोचने लगा
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