Tuesday, 7 June 2016

गांधी कथा --अधिक परेशानी -----ट्रैन सुबह चार्लेस  टाउन पहुंची ! उन दिनों चार्लस टाउन से जोहानिस बर्ग पहुंचने के लिए ट्रैन नहीं चलती थी घोड़ों द्वारा चलने  वाली सिकरम  से जाना पड़ता था ! भारतीय होने के कारण गांधीजी को  सिकरम के अंदर गोरे यात्रियों के बगल में ना बैठाकर सिकरम के बाहर बैठाया    गया ! सिक्रम के गोरे मुखिया को सिगरेट पीनी थी और हबा खानी थी इसलिए  उसने गांधी जी से कहा की अब उस जगह पर वह बैठेगा और गांधीजी को अपने पैरों के पास बैठने  को कहा ! गांधीजी ने जगह से उठने और उसके पेरो के पास नीचे बैठने से मना  कर दिया गोरे ने गांधीजी को तमाचे जड़ने शुरू कर दिए गांधी जी की इस निर्मम पिटाई को सभी यात्री देख रहे थे  ! गोरा पीटने के साथ गालियां  भी दे रहा था ! कुछ यात्रियों को दया आयी और उन्होंने कहा इस बेचारे को क्यों पीट रहे हो ? गोरे ने मारपीट बंद कर दी किन्तु धमकी दी कि सिकरम स्टेंडरटन  पहुँचाने दे फिर तुझे देखूंगा !रात में सिकरम स्टेंडरटन पहुंची वहां गांधीजी कोकई हिन्दुस्तानी चेहरे दिखाई दिए जिस से उनको कुछ तसली हुई ! स्टेंडरटन छोटा सा गाओं है जोहानिसबर्ग विशाल शहर है ! जोहानिस बर्ग में गांधीजी ने होटल में ठहरने का प्रयत्न किया बे चार पांच होटलों में गए किन्तु सभी होटलों ने जगह नहीं है यह कहकर गांधीजीको होटल में रुकने के लिए जगह नहीं दी १  इसीलिए गांधीए जी ने गाडी वाले से मुहम्मद कासिम कमरुद्दीन की दूकान पर ले जाने कोकहा वहां अब्दुल गनी सेठ उनका इन्तजार कर रहे थे  ! उन्होंने गांधीजी का  स्वागत किया ! गांधीजी ने उन्हें होटल में जगह ना मिलने की बात बतायी  1बे यह सुनकर खिलखिलाकर हंस पड़े और बोले बे हम  लोगों कोहोतल में नहीं ठहरने देते हैं ! गांधीजी ने पूंछा क्यों नहीं ?उन्होंने कहा यह बात आप कुछ दिन रहने के बाद समझ जाएंगे ! इस देश में हमारे जैसे अपमान सहने वालेलोग  ही रह सकते हैं क्योंकि हमें व्यापार करना है और पैसे कमाने हैं ! ये कहकर उन्होंने हिन्दुस्तानियों पर होने वाले अत्याचारों को विस्तार से बताया ! ये देश आपके समान लोगों को रहने के लिए नहीं है ! कल आपको प्रेटोरिया जाना है यहाँ आपको तीसरे दर्जे में ही ट्रैन में  जगह मिलेगी यहां पर हिन्दुस्तानियों कोपहले और दूसरे दर्जे का टिकट नहीं  दिया जाता है  !मेने रेलवे के नियम आगे उनमे i इस बात की गुंजाइश थी ! गांधीजी ने स्टेसन मास्टर को पत्र भेजा उसमें उन्होंने अपने बैरिस्टर होने कीबात लिखी और यह भी लिखा कि बे हमेशा प्रथम श्रेणी में ही यात्रा करते हैं ! गांधीजी स्टेसन पर पहुंचे ! स्टेसन मास्टर ने कहा मै आपको एक शर्त पर प्रथम श्रेणी का टिकट दे सकता हूँ कि अगर ट्रैन में गार्ड आपको उतार दे और दूसरे या तीसरे डिब्बे में बैठने के लिए मजबूर करे तो मुझे आप कोसना नहीं ! अब्दुल गनी सेठ गांधीजी को विदा करने आये थे उन्होंने गांधीजी से कहा कि आप सुरक्छित प्रेटोरिया पहुँच जाएँ  ! मुझे डर है कि गार्ड आपको प्रथम दर्जे के डिब्बे में नहीं बैठने देगा अगर गार्ड आपको बैठने भी देगा तो गोरे यात्री आपको डिब्बे से उतार देंगे ! ट्रैन आयी गांधी जीपहले दर्जे के डिब्बे में बैठ गए डिब्बे में गांधीजी के अलावा सिर्फ एक अंग्रेज यात्री और  था !  गार्ड आया वहां गांधीजी को देखते ही गुस्सा हो गया उसने अंगुली से इशारा किया तीसरे दर्जे के डिब्बे में जाओ गांधीजी ने प्रथम श्रेणी का टिकट दिखाया उसने कहा टिकट अपने पास रखो और फ़ौरन इस  डिब्बे से उतरो और तीसरे दर्जे के डिब्बे में जाओ ! अंग्रेज यात्री ने गार्ड को आड़े हांथों लिया और कहा तुम इन भले आदमी कोक्यों परेशान करते हो इनके पास पहले दर्जे का टिकट है मुझे इनके यहाँ बैठने से कोई कष्ट नहीं है  ! गार्ड बडबडाया और उस अंग्रेज यात्री से बोला की अगर तुम कुली के साथ बैठे रहना चाहते हो तो मेरा क्या बिगड़ता है?  और यह कहता हुआ चलागया !उस अंग्रेज यात्री की बजह से गांधी जी अपमान से बच गए औरउन्हें डिब्बे से नहीं उतारा गया !

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