योग
का विरोध नहीं किया जाना चाहिए !किन्तु जिस तरह से राजनैतिक आर्थिक आदि
लाभ प्राप्ति की दृष्टि से योग का उपयोग किया जा रहा है उसका अंधा और
विवेकहीन समर्थन भी नहीं करना चाहिए !भारत गुलाम मानसिकता से ग्रस्त
स्वतंत्र देश है !इसीलिए यहाँ सत्ता पिपासु लोग सत्य का ना तो अनुशीलन
करते हैं ! और ना ही निर्भयता से सत्य का समर्थन करते हैं !ऐसे लोगों के
जीवन के सभी कर्म सिर्फ भोग वैभव सत्ता महत्ता आदि की प्राप्ति के साधन बन
जाते हैं !इसीलिए विवेकवान साहसी सत्यनिष्ठ लोगों को इस विश्व कल्याण कारी
योग विज्ञान को भोगी स्वार्थी अवसर वादी और योग का व्योपार करने वाले योग
गुरुओं से मुक्त कराना होगा !योग की महत्ता विश्व स्तर पर २१ जून के अंतर
राष्ट्रिय योग दिवस ने सिद्ध कर दी है !अब हमें योग के विशुद्ध चित्त
बृत्ति निरोध को विश्व के सामने प्रस्तुत करने का काम करना है !भगवान श्री
कृष्णा ने ६(१,२)में कहा है कि कर्मफल का आश्रय ना लेकर जो कर्तव्य कर्म
करता है वही सन्यासी और योगी है ! जिसने कर्मफल की इक्छा और आश्रय का
त्याग कर दिया है वही सच्चा सन्यासी या योगी है ! कर्म फल की आसक्ति का
त्याग करने से ही परमशान्ति की प्राप्ति होती है ! जिसको सन्यास कहते हैं
वही योग है ! जब तक मनुष्य के ह्रदय में संसार की सत्ता महत्ता और भौतिक
भोगों की प्राप्ति की इक्छा और आकांछा है, और जब तक वह इन कामना प्राप्ति
के संकल्पों का त्याग नहीं कर देता तब तक वह न तो भक्ति योगी ,ज्ञान योगी
,हठयोगी ध्यान योगी कर्मयोगी आदि किसी भी प्रकार का योगि८ नहीं है ! बल्कि
भौतिक सुखों का भोगी है !योग इन भौतिक सुखो के भोगिओं के मध्य समर्थन और
विरोध का मुद्दा बन गया है !ये बो सत्ता महत्ता और भौतिक सुखों की प्राप्ति
के लिए लालायित लोग हैं !जिनके कारण देश की अस्मिता, ईमानदारी त्याग और
तपस्या और कर्तव्यनिष्ठा आज तक स्वार्थ के घने अन्धकार में रो रही है !इस
स्वार्थ के घने अन्धकार से देश को मुक्ति योग दिला सकता है !इन
स्वार्थनिष्ठ व्यक्तियों के जीवन में तो त्याग की गंध भी नहीं मिलेगी !
सिबा भोग की बदबू के अतिरिक्त और कुछ भी दिन के उजाले में भी १००० पावर
के बल्ब की रोशनी में भी दिखाई नहीं देगी !अगर हम योग के महान कल्याण कारी
स्वरूपको देखना, जानना और समझना चाहते हैं !तो हमें बुद्ध ,महाबीर ईशा
मुहम्मद नानक कबीर सिखधर्म के बहुत से गुरुओं अरविंदो महर्शि रमण दयानंद
तिलक महात्मा गांधी आचार्य विनोबा भावे समर्थ रामदास आदि महान आत्मनिष्ठ
कर्मयोगिओं और महाराणा प्रताप शिवाजी आदि राष्ट्र के लिए जीवन उत्सर्ग करने
वाले योद्धाओं और राजस्थान की भूमि में हजारों अपने शील कि रक्षा के लिए
जीवन कि आहुति देने बाली महान महिलाओं और देश सेवा के लिए समर्पित सुभाष
टैगोर आदि आत्मनिष्ठ लोगों के जिए गए जीवनो को अपने आचरणों में उतारने का
प्रयत्न करना होगा !और वर्तमान भारत में भी ईमानदारी से देश हित में
आत्मनिष्ठा से कर्तव्य पालन करने बाले सभी लोगों को जानना और समझना होगा
!किसी भी व्यक्ति राजनैतिक दल या नेता या गेरुवावस्त्र धारी या दाढ़ी
मुसलमानी टोपी लगाए मुला मौलवी के शब्द जाल से मुक्त होकर उसके कथनी पर
ध्यान ना देकर उनकी करनी पर ध्यान देना होगा !सत्य ही हमारे आकलन की कसौटी
होनी चाहिए !राजनीति हमारे जीवन की सभी गतिविधियों को नियंत्रित और संचालित
कराती है !इसीलिए जिन राजनेताओं में कर्त्तव्य निष्ठा राष्ट्रभक्ति और
राष्ट्र प्रेम के दर्शन होते हों उनके इन गुणों की भी हमें मुक्त कंठ से
बिना भेद भाव के प्रसंशा करनी चाहिए !भौतिक भोगों के द्वारा सुख प्राप्ति
की अवांछनीय आकांछाओ से मुक्ति ही योग है !और योग को इसी रूप में स्थापित
किया जाना चाहिए !
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