पर्याबरण के विनाश के लिए जिम्मेदार लोगों पर नियंत्रण करना होगा ---------पानी का कम से कम प्रयोग करो ,एक एक बूँद को बचाओ ,उपयोग के लिए आम जन लकड़ी का प्रयोग ना करें जमीन से मिटटी और नदियों से बालू तथा पहाड़ों से गिट्टी आदि ना ली जाय ----- ये सारी हिदायतें सरकार की ओर से और समाजसेवी संगठनों ,और चिंतकों ,विचारकों अदि की ओर से जुलूस निकालकर ,शपथ ग्रहण समारोह कर ,विचारगोष्ठी अदि आयोजित कर जनसामान्य को दी जाती हैं !इनका प्रकाशन समाचार पत्रों में भी होता है !यह भी एक महत्त्व पूर्ण कार्य है !किन्तु इससे भी अधिक महत्त्व पूर्ण कार्य है उन लोगों पर नियंत्रण करना जो पर्यावरण का विनाश कर सामान्य लोगो का जीवन कष्टमय और नष्ट करते हैं !
(१)सरकार के द्वारा सड़कनिर्माण ,औदौगिक प्रतिष्ठान ओर विकास के लिए अंधाधुंध जंगलों का विनाश ओर ब्रक्छों की कटाई तथा कटे हुए ब्रक्छों के स्थान पर ब्रक्छा रोपण ना करना ! और सरकारी बिभागों और जंगलविभग द्वारा ब्रक्छा रोपण के फर्जी आंकड़े प्रस्तुत करना
(२) उद्द्योग पतियों द्वारा कारखानों के गंदे ओर प्रदूषित जल को नदियों में डालना !ओर सरकारी अधिकारियों के सहयोग से ओर नेताओं के संरक्छण में इस अत्यन्त पर्यावरण विनाशक कार्य का जारी रहना !
(३) प्राकृतिक संसाधनों बालू ,गिट्टी ,मिटटी अदि का अवैध निर्ममता पूर्वक दोहन और इन पर नियंत्रण ना हो पाना आदि!
जो लोग उपर्युक्त विधि से पर्यावरण विनाश में लगे हुए है .बे सब अत्यन्त प्रभावशाली ,ओर शक्तिशाली लोग हैं !आमजनता उनको रोक नहीं सकती है !पर्यावरण का विनाश ये लोग करते हैं !ओर परिणाम जनता भोगती हैं !ओर यही लोग जनता को पर्यावरण संरक्छण का उपदेश भी देते हैं !इन पर्यावरण विनाशक लोगों को पर्यावरण विनाश से आर्थिक लाभ भी बहुत होता है !ब्रक्छों के कटाने से गर्मी बढ़ती है !तो बिजली के पंखे ,कूलर आदि का उत्पादन बढ़ जाता है !बिजली के अधिक उपयोग के कारण विजली की खपत बढ़ जाती है !जिसकी पूर्ति के लिए जनरेटर ,इन्वर्टर आदि का उत्पादन बढ़ता है !वायु ओर जल प्रदुषण की मुक्ति के लिए ऑक्सीजन मास्क ओर मिनरल वाटर और आर ओ आदि की बिक्री बढ़ जाती है !भासन देने के रोग से ग्रस्त भासण देने वालों और समय काटने के लिए समाज सेवा करने वाले लोगों को भेी समाज सेवा का अवसर प्राप्त हो जाता है !और आमजनता जिसका पर्यावरण विनाश से कोई सम्बन्ध नहीं होता है वह कष्ट भी भोगती है और इनके भासण भी सुनती है !परमात्मा ने पर्याप्त जल की व्यबस्था की है ,रहने के लिए जल जंगल और जमीन भी दी है !किन्तु इन थोड़ से लोगों की लालच के कारण और कुछ धर्मों की गलत मान्यताओं के कारण अवाडी के विस्फोट के कारण जनसामान्य कष्ट भोग रहा है !अगर ये पर्यावरण विनाशक लोग लालच का त्याग कर पर्यावरण का विनाश ना करें और प्रकृति के स्वाभाविक विकास में अवरोध उत्पन्न ना करें तो पर्यावरण अपने आप सुरक्छित हो जाएगा !
(१)सरकार के द्वारा सड़कनिर्माण ,औदौगिक प्रतिष्ठान ओर विकास के लिए अंधाधुंध जंगलों का विनाश ओर ब्रक्छों की कटाई तथा कटे हुए ब्रक्छों के स्थान पर ब्रक्छा रोपण ना करना ! और सरकारी बिभागों और जंगलविभग द्वारा ब्रक्छा रोपण के फर्जी आंकड़े प्रस्तुत करना
(२) उद्द्योग पतियों द्वारा कारखानों के गंदे ओर प्रदूषित जल को नदियों में डालना !ओर सरकारी अधिकारियों के सहयोग से ओर नेताओं के संरक्छण में इस अत्यन्त पर्यावरण विनाशक कार्य का जारी रहना !
(३) प्राकृतिक संसाधनों बालू ,गिट्टी ,मिटटी अदि का अवैध निर्ममता पूर्वक दोहन और इन पर नियंत्रण ना हो पाना आदि!
जो लोग उपर्युक्त विधि से पर्यावरण विनाश में लगे हुए है .बे सब अत्यन्त प्रभावशाली ,ओर शक्तिशाली लोग हैं !आमजनता उनको रोक नहीं सकती है !पर्यावरण का विनाश ये लोग करते हैं !ओर परिणाम जनता भोगती हैं !ओर यही लोग जनता को पर्यावरण संरक्छण का उपदेश भी देते हैं !इन पर्यावरण विनाशक लोगों को पर्यावरण विनाश से आर्थिक लाभ भी बहुत होता है !ब्रक्छों के कटाने से गर्मी बढ़ती है !तो बिजली के पंखे ,कूलर आदि का उत्पादन बढ़ जाता है !बिजली के अधिक उपयोग के कारण विजली की खपत बढ़ जाती है !जिसकी पूर्ति के लिए जनरेटर ,इन्वर्टर आदि का उत्पादन बढ़ता है !वायु ओर जल प्रदुषण की मुक्ति के लिए ऑक्सीजन मास्क ओर मिनरल वाटर और आर ओ आदि की बिक्री बढ़ जाती है !भासन देने के रोग से ग्रस्त भासण देने वालों और समय काटने के लिए समाज सेवा करने वाले लोगों को भेी समाज सेवा का अवसर प्राप्त हो जाता है !और आमजनता जिसका पर्यावरण विनाश से कोई सम्बन्ध नहीं होता है वह कष्ट भी भोगती है और इनके भासण भी सुनती है !परमात्मा ने पर्याप्त जल की व्यबस्था की है ,रहने के लिए जल जंगल और जमीन भी दी है !किन्तु इन थोड़ से लोगों की लालच के कारण और कुछ धर्मों की गलत मान्यताओं के कारण अवाडी के विस्फोट के कारण जनसामान्य कष्ट भोग रहा है !अगर ये पर्यावरण विनाशक लोग लालच का त्याग कर पर्यावरण का विनाश ना करें और प्रकृति के स्वाभाविक विकास में अवरोध उत्पन्न ना करें तो पर्यावरण अपने आप सुरक्छित हो जाएगा !
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