संसार की समस्त परिस्थितियां आने जाने वाली ,मिलने और बिछुड़ने वाली हैं ! मनुष्य चाहता है कि सुख दाई परिस्थिति बनी रहे और दुःख दाई परिस्थिति कभी ना आये परन्तु सुख दाई परिस्थिति जाती ही है और दुःख दाई परिस्थिति आती ही है ---- यह प्राकृतिक नियम है ! इसीलिए प्राणियों के निकट जो सुख या दुःख उपस्थित होता है वह सब उन्हें विवश होकर सहना ही पड़ता है ! बचपन में युवाबस्था में प्रौढ़ा वस्था में अथवा बृद्धा वस्था में कभी ना कभी ये क्लेश अनिवार्य रूप से प्राप्त होते ही हैं ! जैसे शव्द ,स्पर्श ,रूप ,रस ,और गंध स्वाभवतः आते जाते रहते हैं ! उसी प्रकार मनुष्य सुखों और दुखों को प्रारब्ध के अनुसार पाते रहते हैं !
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