Thursday, 12 May 2016

सिंघस्थ उज्जैन में विचार महाकुंभ -----  मध्यप्रदेश की भाजपा  सरकार के संरक्छण में विचार महाकुंभ का आयोजन हुआ !जिसमें संघ प्रमुख श्री मोहन भागवत ,श्रीलंका  से पधारे बौद्ध भिक्छु ,श्री  अवधेशानंद गिरी और अखिल  भारतीय गायत्री परिवार के प्रमुख श्री प्रणव पंड्या आदिने अपने महत्त्व पूर्ण विचार प्रस्तुत किये !सभी उपदेशकों ने भारतीय धर्म  और ,अध्यात्म की महत्ता को प्रतिपादित किया और आगामी समय में भारत केसुनहले भविष्य की भविष्यवाणी भी की !विचार कुम्भ में उपदेश देने वाले ये चारों महापुरुष विशाल धार्मिक संगठनों के संचालक हैं !व्योपारी लोग साल के अंत में अपने व्यापार का लेखा जोखा कर साल भर के व्यापार के लाभ हानि की बैलेंस शीट तैयार करते हैं !और अगले साल के लिए लाभ की दृष्टि से व्यापार करने की योजना बनाते हैं !धार्मिक संगठनों के संचालकों को भी अपनी बैलेंस शीट जनता के सामने प्रस्तुत करना चाहिए कि उन्होंने अपने जन्म से लेकर आजतक अपने संगठनों से सम्बद्ध लोगों में धर्म के मूल तत्त्व  सत्य ,अहिंसा ,ब्रह्मचर्य ,अस्तेय और अपरिग्रह का कितना विकास किया ! तथा इस से समाज में कितना रचनात्मक बदलाव आया !ताकि लोग यह जान सकें और समझ सकें कि आने वाले समय में भारत का भविष्य इन लोगों के कारण उज्जवल होगा !अभीे तो जो देखने में आरहा है ! कि धार्मिक लोग ईश्वर की शक्ति ,स्मरण ,पूजन ,कथा वार्ता ,सत्संग ,साधना अदि का उपयोग अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए कर रहे हैं !बहुत से व्योपारी ,ठेकेदार ,राजनेता ,पूंजीपति .अधिकात्री कर्मचारी प्रॉपर्टी डीलर अदि भव्य धार्मिक आयोजन करते और करवाते हैं !किन्तु कर्तव्य छेत्र में छल ,कपट ,बेईमानी ,धूर्तता  आदि का जीवन अपने निकृष्ट स्वार्थों कि पूर्ति के लिए करते हैं और कर्तव्य का पालन नहीं करते हैं ! !इसीलिए देश में कर्मसन्कर्ता चारों और व्याप्त है !प्रमाणिकता का घोर अभाव है !ईश्वर की शक्तिकागलत उपयोग हो रहा  हैं !निश्चित रूप से भारत की आध्यात्मिक विरासत में भारत के सुन्हले  भविष्य की शक्ति विदयमान है !किन्तु उसका सृजन सिर्फ विचार कुम्भ से नहीं हो सकता है !विचार श्रेष्ठ हैं किन्तु उनका क्रियाँबन नहीं हो रहा है !उनके क्रियाँबन के लिए आवश्यक आचरण का पूर्ण अभाव है!  आध्यात्मिक विरासत को संजोने के लिए कथनी से अधिक करनी पर जोर देना होगा !कथनी मीठी खांड सी करनी विष की लोय !कथनी तज करनी करे विष से अमृत होय !

No comments:

Post a Comment