Monday, 30 May 2016

सावरकर बन्धु ------ ब्रिटिश सरकार ने १९१९ में एक अधिनयम के द्वारा उन  राजनैतिक अपराधियों को जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के साथ सहयोग करने की शर्त स्वीकार कर ली थी उनके विरुद्ध राज्य द्रोह के मुकदद्मे वापिस लेने और उन्हें जेल से रिहा करने का आदेश वाइस राय को दिया था ! सावरकर बंधुओं ने अपने राजनैतक विचार स्पष्ट करते हुए कहा था कि अब उनके मन में किसी प्रकार का क्रांतिकारी इरादा नहीं है !




















1और अगर उन्हें मुक्त कर दिया गया तो बे सुधार कानून केअधीन काम करना पसंद करेंगे क्योंकि उनका ख्याल है की अधिनियम में निर्दिष्ट सुधारों से देश की जनता को लाभ होगा दोनों ने स्पष्ट शव्दों में बता दिया था कि बे अब ब्रिटिश सम्बन्धों से भारत को मुक्त नहीं कराना चाहते हैं ! बे यह महसूस करते हैं कि भारत की किस्मत ब्रिटेन के साथ रहकर ही सबसे अच्छी तरह गढ़ी जासकती है ! किन्तु ब्रिटिश सरकार ने उनके इस लिखित वक्तव्य के बाद भी उनको रिहा नहीं किया था  !तब सावरकर के सबसे बड़े भाई ने गांधी जी से अपने दोनों भाईयों की रहाई के लिए प्रार्थना  की थी !और भी लोगों ने गांधी जी से इस प्रकरण को ब्रिटिश सरकार के सामने रखने के लिए कहा था  !गांधी जी ने ब्रिटिश सरकार से कहा था कि सावरकर बंधुओं की प्रतिभा का उपयोग जनकल्याण के लिए होना चाहिए !अगर भारत इसी तरह सोया पड़ा रहा तो तो उसके ये दो निष्ठाबान पुत्र सदा के लिए हांथ से चले जाएंगे ! दोनों भाईयों का शरीर जेल की यातनाओं से जर्जर हो चुके है ! एक सावरकर भाई को मैं अच्छी तरह जानता हूँ मुझे लन्दन में उनसे भेंट का सौभाग्य मिला था ! (विनायक दामोदर सावरकर से गांधीजी की मुलाक़ात १९०९ में लन्दन में विजयादशमीके उपलकछय में आयोजित एक भोज में हुई थी ) बे बहादुर हैं ,चतुर हैं देशभक्त हैं !बे क्रन्तिकारी हैं और इसे छिपाते नहीं हैं !मौजूदा ब्रिटिश  शाशन प्रणाली की बुराईका सबसे भीसण रूप उन्होंने बहुत पहले देख लिया था ! मुझ से भी काफी पहले समझ लिया था ! बे आज भारत को,अपने देश को दिलोजान से प्यार करने के अपराध में काले पानी की सजा भोग रहे हैं ! अगर सच्ची और न्यायी सरकार होती तो बे किसी ऊँचे शासकीय  पद को सुशोभित कर रहे होते ! मुझे उनके और उनके भाई के प्रति बड़ा दुःख है ! गणेश सावरकर तो १४ साल २ मास की सजा भोग चुके हैं अतः कानूनन उन्हें रिहाई का अधिकार प्राप्त है ! भारतीय दण्ड सहित का खण्ड ५५ इस प्रकार है -----ऐसे हर मामले में जिसमें आजीवन काले पानी की सजा दी जाती है भारत सरकार अथवा उस स्थान की सरकार जिसकी सीमा में उक्त दण्ड दिया गया हो दोनों में से हर तरह के अभियुक्त की सहमति के बिना उसकी सजा घटाकर १४ साल की जा सकती है ! इस धारा  के अंतर्गत दोनों भाईओं को दो मास पूर्व ही रिहा होजाना चाहिए था ! चूँकि दोनों भाई अण्डमान से हटा दिए गए हैं ! इसीलिए जिस खण्ड को मेने उद्धृत किया है वह उनके पक्छ में लागू किया जाना चाहिए ! गांधी जी के प्रयत्न और हस्तछेप से दोनों भाई १९३७ में रह कर दिए गए थे !विनायक दामोदर सावरकर गांधी बध में मुल्जिम थे किन्तु अपराध सिद्ध ना होने के कारण छोड़ दिए गए थे !    

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