Tuesday, 17 May 2016

यहाँ जो कहा गया है वह एकदम सही है !किन्तु इस बिभीषका का सबसे बड़ा खतरा भारत में दिखाई देता है !आज भारत भारत नहीं है यह चूँ चूँ का मुरब्बा बन गया है ! भारत में जो प्रकृति के संरक्छण के उपाय अत्यंत प्राचीन काल में ही खोज निकाले थे !उन पर हम लोग ध्यान नहीं दे रहे हैं !भारत ने जनसँख्या नियंत्रण का सूत्र दिया था !हजार मुर्ख पुत्रों से एक योग पुत्र उसी प्रकार से उत्तम है ! जैसे हजारों तारागणों से एक चन्द्रमा उत्तम होता है !हजारों तारा गण प्रकाश पैदा नहीं कर पाते हैं ! किन्तु एक चन्द्रमा सारे अन्धकार को समाप्त कर देता है !श्रष्टि में भारत ने सभी जीव जंतुओं को बराबर का हिस्सेदार माना था !इसीलिए जीव जंतुओं को अभय दान था !चिड़ियोँ का कलरव और मुर्गे की बांग से हमारी सुबह होती थी !गाय के दूध से हमारे शरीरों का पोषण होता था !उसका गोबर मूत्र भी औसिद्धि के गुणों से युक्त था !किन्तु आज मुर्गा बकरा तीतर बटेर हिरन गाय आदि मांसाहारियों के उदर में चले गए हैं ! भारत में नदियों और ब्रक्छों में भी जीवन खोज निकाला था !इसीलिए जंगल पूरी तरह सुरक्षित और संरक्षित थे नदियां भी शुद्ध निर्मल जल से भरी रहती थी !भारत बासी जंगलों नदियों पशु पक्छियोँ जीव जंतुओं के प्रति आदर का भाव रखते थे !भारत सोने की चिड़िया कहलाता था !धन धन्य से परिपूर्ण था !दूध दही की नदियां बहती थी !इस संस्कृति का परित्याग हमने कर दिया है !अब देश में पशुओं पक्छोयों के खून की नदियां बहती है !सीमेंट और लोहा ईंट गिट्टी मिटटी के जंगल दिखाई देते हैं !सम्बेदन हीन मनुष्य दीखते हैं !हम अपने सर्वनाश का इतिहास खुद लिख रहे हैं!अगर हम बदलने को तैयार हो तो ऋषि प्रणीत आत्मनिष्ठ संस्कृति हमारे पास है ! जिसको अपनाकर हम खुद विनाशकारी बिभीषका से बच सकते हैं और विश्व को भी बचा सकते हैं !

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