पश्चिम की संस्कृति और भारत की संस्कृति और जीवन पद्धति तथा जीवन दृष्टि में बहुत अंतर है !पश्चिमी देशों में मदर डे ,फादर डे आदि मनाये जाते हैं ! क्योंकि उन देशों में शादियां स्थाई नहीं होतीहैं !और कुछ स्थायी भी होती हैं !किन्तु ऐसी एक भी शादी नहीं होती है जिसमें कहा जाता हो कि हमारा जन्मों जन्मों का साथ है !और अगले जन्म में भी रहेगा !इसिलए कभी कभी ऐसा होता है कि संतान की माँ एक होती है किन्तु पिता बदल जाते हैं !इसीलिए जिन बच्चों का पिता के साथ रहने से माँ से विछोह हो जाता है !बे मदर डे मनाकर माँ के प्रेम और उपकारों का श्रद्धा से स्मरण करते हैं !इसी प्रकार फादर डे में भी होता है !भारत में शादियां प्राचीन काल में शायद ही टूटती रही हों !इसीलिए इस देश में ये फादर ,मदर डे मनाने की परम्परा नही रही है !यहाँ माता के प्रति श्रद्धा और प्रेम स्वभाव सिद्ध रहा है !और माँ को ही केंद्र विन्दु में रख कर यहाँ भारतमाता ,गौमाता प्रथ्वीमाता ,गुरुमाता ,देवी माता अदि श्रद्धास्पद माँ सूचक शव्दों का व्यापक प्रयोग हुआ है !इस समय भारतीय धर्म संस्कृति का अवमूल्यन अज्ञान ,अहंकार और स्वार्थ के कारण हिन्दुओं के दव्वरा हो रहा है !इसीलिए बहुत गलत परम्पराओं का जन्म हो रहा है !अगर इस गलत परम्परा के कारण भी माँ के उपकारों का लोग स्मरण करें और माँ के साथ आदर ,सम्मान का व्योहार करें तो यह भी ठीक है !अगर हमारी श्रद्धा सिर्फ शब्दों तक ही सीमित है तो यह शाब्दिक श्रद्धा तो वैसी ही है जैसे ड्राईंग रूम में सजे हुए कागज़ के सुगंध रहित कागज़ के फूल !
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