Tuesday, 17 May 2016

चापलूसी और भक्ति में भेद करना आजकल नेता लोग भूल गए हैं !नेता की स्थापना और प्रतिस्थापना तथा उद्भव और विकास चापलूसी से ही होता है !चापलूस चमचे का काम करता है !चमचा नातो सब्जी काटता है और ना बनाता है वह सिर्फ बनी हुई सब्जी को पतीली से बाहर लाने भर का काम करता है !पतीली और चमचे का साथ जभी तक रहता है जब तक पतीली में सब्जी रहती है !सब्जी ख़त्म और चमचा बाहर !इस प्रकार नेता का नेता के साथ और जनता का साथ जभी तक रहता है जबतक नेता के पास नेता को देने के लिए ताकत होती है ! और जनता जब तक नेता को चुनकर विधानसभा या अन्य संस्थाओं में भेजती रहती है !जनता का नेता को समर्थन खत्म और नेता गायब !भाजपा हिन्दू धर्म की बात करती है !किन्तु उसके ये नेता हिन्दू धर्म का मर्म नहीं समझते हैं !इसीलिए भगवान शंकर को भी चापलूसों का वशवर्ती समझ कर अनुचित टिप्पड़ी करते हैं !और इनको द्वापर से लेकर कलयुग तक का सारा इतिहास चापलूसों और चापलूसी का दिखाई देता है !भक्ति के बश भगवान होते हैं !भक्ति के मानदंडों को जीवन में अपनाकर जो अपनी बुद्धि मन चित्त और समस्त अंतर बाह्य क्रियाओं का प्रवाह सांसारिक सम्बन्धों से हटकर परम शक्ति की ओर कर देता है !उसे भगवती शक्ति की प्राप्ति हो जाती है !भक्ति के इन मानदंडो को कभी कभी ऐसे लोग भी अपना लेते हैं जो प्रारम्भ में तो भक्त होते हैं ! किन्तु शक्ति प्राप्त कर भस्मासुर बन जाते हैं !और फिर भस्मासुर के रूप में ही उसी भगवती शक्ति से खुद ही भस्म हो जाते हैं !किन्तु चापलूस तो जिसकी चापलूसी करता है और जिसके साथ रहता है उसीको चापलूसी से भस्म कर देता है !और फिर चापलूसी के लिए अन्य ठिकाना तलाश लेता है !

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