Sunday, 15 May 2016

जो युवा प्रेरक वाक्योँ का उद्धरण पोस्ट करते हैं !उन्हें यह समझना चाहिए की बे किसी की जीवनचर्या के अनुभव से निकले हुए होते हैं !या किसी के जीवन में आदर्श प्राप्ति के लक्छ्य होते हैं और उनका जीवन उसी लक्छ्य की प्राप्ति के लिए समर्पित होता है !और बे प्रेरक वाक्य जभी लिखे जाते हैं जब बे अपने आचरण से सिद्ध हो जाते हैं !इसीलिए इस समय प्रेरक कर्म करने की आवश्यकता है !प्रेरक वाक्य लिखने की नहीं !समाज जिन समस्यायों से पीड़ित है उन समस्यायों को खुली आँखों से देख कर फिर उनको सुलझाने के लिए ईमानदारी और साहस से प्रयत्न करने की आवश्यकता है !एक स्वतंत्रता संग्राम गुलामी से देश को मुक्त कराने के लिए लड़ा गया था !और अब दूसरा संग्राम देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने के लिए लड़ा जाने की आवश्यकता है !भ्रष्टाचार का कैंसर पूरे सामजिक और राष्ट्रिय जीवन को प्राणांतक कष्ट दे रहा है !इस कष्ट के निवारण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने अपने कर्तव्य छेत्र में ईमानदारी और कर्त्तव्य निष्ठां का प्रवेश कराना पड़ेगा !किसी को भी दूसरे पर दोषा रोपण करने के बजाय अपने कर्तव्य कर्म पर ही विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है !देश में संविधान है !और उसके तहत कानून का शाशन है !इसीलिए किसी को गाली देने के बजाय कानून का सहारा लेना चाहिए !प्रेरक वाक्यों के उद्धरण पोस्ट करने के बजाय वर्तमान में कर्तव्य निष्ठ व्यक्तियों के आचरणों को पोस्ट करना चाहिए !और भ्र्ष्टाचारियों की भ्रष्टाचार से उपार्जित संपत्ति को भी बताना चाहिए !तथा कर्तव्य निर्बहन में कर्तव्य निष्ठ लोगों को क्या कठिनाइयां आती हैं !इन पर भी प्रकाश डालना चाहिए !इस समय के यही प्रेरक वाक्य हैं !

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