विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस ------------ मानव समूहों की व्यबस्था करने की खोज में मनुष्य लोकतान्त्रिक व्यबस्था तक पहुंचा है !इस खोज में प्रेस यानी समाचार पत्रों का विशेष योग दान रहा है !इसको ऐसे भी समझा जा सकता है की मानव समूहों की लिए उत्तम सामजिक व्यबस्था निर्मित करने की लिए ही समाचारपत्रों का जन्म हुआ था ! मानव समूह अब इस लोकतांत्रिक व्यबस्था से भी संतुष्ट दिखाई नहीं देता है !लोकतंत्र भी अब लड़खड़ाता हुआ चल रहा है !लोकतांत्रिक व्यबस्था के आधारभूत तत्त्व लोकतंत्र व्यबस्था में संलगन राजनेताओं ,राज्य अधिकारियों ,कर्मचारियों और लोकतांत्रिक तथा विभिन्न समाजिक ,संगठनों के तुच्छ स्वार्थों की पूर्ति के साधन बन गए हैं !मानवीय अधिकारों का संरकछक और कर्तव्यों को दिशा देने वाला और लोकतंत्र को पुष्ट करने वाला मीडिया भी अब बेसा नहीं रहा जैसा वह अपने जन्म काल में था ! स्वतंत्रता की अलख जगाने वाला प्रेस अब स्वतंत्रता की पुकार के साथ अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति में संलग्न देखा जाता है ! प्रेस की स्वतंत्रता ,प्रेस के पास ही संरक्छित एवं सुरक्छित है !जिस प्रेस का जन्म ही मानव अधिकारों की सुरक्छा और दिशा बोध के लिए हुआ था !उसको स्वतंत्रता कौन दे सकता है ?शक्कर की मिठास तो शक्कर में ही स्वाभाविक रूप से विदयमान रहती है !इसी प्रकार से प्रेस की स्वतंत्रता तो स्वाभाविक रूप से प्रेस में ही अन्तरनिहित है !
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