Friday, 27 May 2016

पराह्न बजे ·
गांधी जी के बारे में जो भ्रम राजनीति के कारण उन लोगों ने फैलाया जो ,देश की स्वतंत्रता नहीं चाहते थे !और जो न देश को उसका पुरातन परिवर्तित गौरव स्वरुप ही प्राप्त होने देना चाहते थे i और ना ही जिन्होंने देश की आजादी की लड़ाई में कोई हिस्सा लिया था !और जिन्हे स्वतंत्रता कैसे प्राप्त हुई इसकी भी सही जानकारी नहीं है !बे इस तरह के गैर जिम्मेदारी के असत्य मनगढ़ंत आरोप गांधी जी पर लगाते हैं !उनकी उपेक्छा करना ही ठीक है !उनके लिए तो सिर्फ यही कहना ठीक है की सूर्य की ओर मुंह कर के थूका गया थूंक सूर्य पर नहीं थूकने वाले के ही सर पर गिरता है !जिस संकुचित कटटरपंथी विचार के ये गांधी जी का भ्रामक प्रचार करने वाले लोग पोषक है और प्रचारक है !तथा जिन पुश्तकों या लोगों से इन्हे यह घातक ज्ञान प्राप्त हुआ है !यदि उन विचारों को प्रश्रय देने वाली राजनैतिक सत्ता आज देश में है !तो इन आँख के अंधों और लकवाग्रस्त दिमाग वालों को जल्दी से जल्दी सरकार के सहयोग से गांधी जी का चित्र नोटों पर से हटवा देना चाहिए !और देश के सभी स्थानो से गांधी जी की प्रतिमाएं भी हटवा देनी चाहिए और गांधी जी का संपूर्ण साहित्य भी आग की भेंट करवा देना चाहिए !इस से गांधी जी की आत्मा को शांति मिलेगी ! क्योँकि गांधी जी स्वयं नहीं चाहते थे कि उनका चित्र किसी जगह छपे !उन्होंने कहा था की अच्छा यह होगा की जो कुछ मैने कहा है और लिखा है वह मेरी मृत्यु के बाद मेरी ल्हास के साथ ही जला दिया जाय !क्योंकि कायम वह नहीं रहेगा जो मैने कहा है !कायम वह रहेगा जो मैने किया है !मृत्यु के बाद भी मेरे अहिंसा और सत्य पोषक जीवन चर्या युगों युगों तक मार्ग दर्शक बन कर प्रेरणा देती रहेगी !मैने कोई नया सिद्धांत उत्पन्न नहीं किया है !मेने सत्य अहिंसा संयम सेवा के उन्ही भावों को आत्मशात करने का प्रयत्न किया है !जिनको भारत के ऋषिओं मनीषियों ने अपने जीवन में जिया था !गांधी जी किसी भी रूप स्वरुप में अपनी स्मृति के पोषक नहीं थे !किन्तु उनके चाहने वालों ने उनकी मूर्तियां खड़ी करदी ! उनके नाम के आश्रम बना दिए ! उनके जन्म दिन पर छुट्टी घोषित कर दी !और आज भी विश्व का अधिकाँश देशों में उनकी स्मृति में मूर्तियां खड़ी की जारही है उनके नाम के डाक टिकट जारी किये जा रहे हैं !और संयुक्त राष्ट्र संघ ने उनके जन्म दिवस को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है !दूसरी और ये भ्रम फ़ैलाने वाले लोग हैं !जिन्हे गांधी जी का नाम शूल के सामान चुभता है !और ये अपने मनगढंत आरोपों के कारण खुद तो जान बूझ कर अन्धकार के गहरे खड्ड में पड़े हुए हैं !यह इसप्रकार के कुत्सित असत्य प्रचार से दूसरे लोगों के चित्त को भी दूषित करते हैं !इसीलिए इनको यह स्वर्ण अवसर प्राप्त हुआ है ! कि यह गांधी जी की विदाई कर महान देशभक्त नाथू राम गोडसे की प्रतिमाएं स्थापित कर दे !और जो भो इनकी नजर में देश को आजाद कराने वाले हैं उनकी प्रतिमाएं सम्पूर्ण छेत्रों में स्थापित करा दे !फिर इन्हे पता लगेगा की देश इन्हे किस रूप में शीघ्र ही याद करेगा !

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