Tuesday, 5 July 2016

बर्तमान काल में सम्भ्रान्त शव्द अब धनबान या पद प्रतिष्ठा का सूचक नहीं रह गया है !क्योँकि अब तो नेता मंत्री बड़े बड़े अधिकारी भी घोटालों, रिश्वत और कमीशन, हत्या, बलात्कार आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जेल जा रहे हैं ! और सजा भी खा रहे हैं !अब पद पैसा या प्रतिष्ठा सम्भ्रान्त होने के लिए पर्याप्त नहीं है !जो लड़के लड़कियां ऊँचे होटलों में सेक्स रैकेट या नशाखोरी या रेव पार्टियों में पकडे जाते हैं !बे इन्ही तथाकथित सम्भ्रान्त लोगों की संताने होते हैं !आज सही मायने में संभ्रांत वह व्यक्ति है !जो अपने कर्त्तव्य कर्मों का निर्बहन बिना किसी लोभ लालच के कर रहा है ! !बाकी के संभ्रांत कहलाने वाले लोग सिर्फ गलत अर्थों में सम्भ्रान्त है !बे वास्तव में उद्भ्रान्त है सम्भ्रान्त नहीं हैं !

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