Wednesday, 20 July 2016

जब देश गुलाम था तो पुलिस ब्रिटिश शासकों और जमींदारों आदि के लिए काम करती थी !इसलिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बिरोध के निशाने पर पुलिस रहती थी !परतंत्र भारत में अपराध भी बहुत कम होते थे !इसलिए पुलिस थानो की संख्या बहुत कम थी !तथा एक थाने में एक थाने दार और ७,८ सिपाही ही १००,१५० गाओं पर नियंत्रण कर लेते थे !पुलिस के नाम से ही लोग भयभीत हो जाते थे ! स्वतन्त्र भारत में जब तक कांग्रेसी शासन रहा ! कोंग्रेसियों ने कभी भी पुलिस का इस्तेमाल निजी स्वार्थों के लिए नहीं किया !नाही अपराधियों को छुड़ाने का प्रयत्न किया !राजनेता भी अपराधी चरित्र के नहीं होते थे !तथा प्रधानमन्त्री तक की सुरक्षा व्यबस्था में बहुत सुरक्षा कर्मी नहीं लगते थे ! किन्तु आज की इस्थिति बिलकुल भिन्न है !आज संसद में विधान सभाओं में बहुत से ऐसे सांसद और विधायक हैं !जिन पर संगीन अपराधों के मुकदद्मे दर्ज हैं ! !तथा इन नेताओं के बहुत से समर्थक आपराधिक चरित्र के हैं !नेताओं के अवैधानिक हस्तछेप ने पुलिस को ठुल्ला बनादिया है !पुलिस को स्वतंत्रता से कर्तव्य पालन करने दिया जाय तो वह नेताओं को ठुल्ला का सही अर्थ समझा देगी !

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