Friday, 29 July 2016

जागृत जन भागीदारी के अभाव में लोकतंत्र व्यबस्थित ढंग से नहीं चलसकता है ------- लोकतंत्र की सरकारों का निर्वाचन भी बालिग मताधिकार से होता है !इसके अलावा जितनी भी संस्थाएं होती हैं ! बे सभी भी नागरिकों द्वारा निर्मित और संचालित होती हैं !यदि प्रतिनिधियों के निर्वाचन में मतदाता अपने मत का उचित प्रयोग नहीं करता है !और समाज में संस्थाएं भी अपने कर्तव्य का निर्बहन नहीं करती हैं !तो फिर लोकतंत्र का तो यही स्वरुप होगा जो भारत बर्ष में है !यही बहुत है कि यहाँ लोकतंत्र है !इस समय देश दो राहे पर खड़ा हुआ है !या तो स्वस्थ लोकतंत्र का विकास होगा या लोकतंत्र का विनाश होगा !यथा स्थिति नहीं रहेगी !सोशल मीडिया सभी प्रकार के लोगों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बन गया है !इसीलिए जिन लोगों को देश की संस्थाओं को लेकर कुछ कहना है !उन्हें जिम्मेदारी के साथ सभी तथ्यों को दृष्टिगत रख कर विचार व्यक्त करना चाहिए !सिर्फ समस्यायें ही नहीं उनका समाधान भी प्रस्तुत करना चाहिए !आजकल न्याय व्यबस्था पर काफी प्रहार किये जा रहे हैं !सलमान और जयललिता आदि  आरोप मुक्त हो जाते हैं !और लालू यादव आदि जमानत पर रिहा हो जाते हैं ! और जेलों में राजनैतिक बंदियों और दबंगों तथा पैसे वालों को सभी सुविधाएं प्राप्त होतीहैं !  इसमें लोग धनबल  और राजनैतिक संरक्छण को  जेलों में सुबिधा प्राप्ति के लिए और उनकी न्यायलय से  रिहाई में कारण मानते हैं !और न्याय व्यबस्था पर हमला करते हैं ! न्यायाधीश ना तो मुकद्दमा स्वतः  दर्ज कृते हैं ,न अपराध की जाँच करते हैं !बे सिर्फ उपलब्ध साक्छ्य के आधार पर फैसला करते हैं !गबाह आदिपेश करने और अभियोग पत्र दाखिल करने का काम अभियोजन करता है !यदि सलमान के प्रकरण में उसके विरुद्ध आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्छी प्रस्तुत नहीं किये गए !इसिकिए वह अपराध मुक्त हो गए इसमें न्यायलय का क्या दोष है ? जयललिता के विरुद्ध अपील उच्चतम न्यायलय में विचाराधीन है !अगर किसी व्यक्ति पर गंभीर अपराध के आरोप हैं !और उन आरोपों का प्रकरण २० साल न्यायलय में चलता है !और इसके बाद उसके आरोप सिद्ध नहीं होते हैं !और वह आरोप मुक्त हो जाता है !ऐसी स्थिति में उसके २० बर्ष जेल में रहने की भरपाई कैसे होगी ? मुकदमो का निर्णय शीघ्र होना चाहिए !और उच्चतम न्यायालय तक की जाने वाली अपीलें की सुनबाई  भी एक साल के अंदर हो जानी चाहिए ! ताकि जिस व्यक्ति को सजा या आरोप मुक्ति जो भी कानून के अनुसार होना हो अंतिम रूप से  समाप्त हो जानी चाहिए !सलमान का यह मुकद्दमा १७ साल में निर्णीत हुआ है !सजा होने के पहले ही सलमान ने कितनी मानसिक सजा भोगी और कितनी रोटियां सेंकी इसका अनुमान तो कोई लंबीअविधि  तक मुकद्दमा लड़ने वाला ही अनुभव कर सकता है ! सलमान की जवानी मुकद्दमों को भेंट हो गयी !

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