लोकतंत्र का अभिशाप है ! महत्त्वपूर्ण पदों पर बैठे व्यक्तिओं में
कर्त्तव्य निष्ठा और स्वार्थ निष्ठा के कारण दूरदृष्टि का अभाव ! इसीलिए
शिक्छा जैसे चरित्र निर्माण के छेत्र में भी भारी दुर्दशा देखने कोमिलती है
!प्राथमिक शिक्छा से लेकर विश्वविद्यालय तक की शिक्छा का व्यबसायी करण हो
गया है !सरकार द्वारा संचालित विद्यालय शिक्छा के लिए निरुपयोगी हो गए हैं
!परिणामस्वरूप अभिभावक अपने बच्चों का प्रवेश प्राइवेट पब्लिक स्कूलों में
कराते हैं !और प्राइवेट स्कूल के संचालक अध्यापकों का भी शोषण
करते हैं !और अभिभावकों से भी मनमानी फीस बसूलते हैं !और बच्चों की भी जान
जोखम में इस प्रकार वाहनो से भरकर लेजाने से हो जाती है !इसमें अभिभावक और
स्कूलों के संचालक दोनों ही दोषी हैं !किन्तु सब से अधिक अपराधी तो बो हैं
!जो सरकार चलाते है ! और बो शिक्छक और शिक्छा अधिकारी हैं !जो इतने
स्वार्थ में अंधे हो गए हैं !कि उन्हें न बच्चों की जान की चिंता है !ना ही
देश के भविष्य की चिंता है !
No comments:
Post a Comment