तथाकथित अम्बेडकवादियों ने हिंदुओं और हिन्दू धर्म को अपशव्दों से अलंकृत करने का स्वभाव बना लिया है ------- निहित राजनैतिक स्वार्थों के कारण अल्पबुद्धि स्वार्थनिष्ठ राजनैतिक दलों ने राजनैतिक चश्मे से डॉ अम्बेडकर का मूल्यांकन कर उनके अश्पृश्यता के दर्द को स्वस्थ रचनात्मिक दृष्टि न देकर निकृष्ट स्वार्थपोषण का माध्यम बना लिया है !और आरक्छण से पुष्पित और पोषित दलितों ने आरक्छण को दलित विकास के नाम पर अपने निजी भौतिक समृद्धि का साधन बना कर दलितों को आरक्छण के लाभ से वंचित कर दिया है !और अस्प्रश्यता को हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा कलंक मानकर इसके समूल नाश को कृत संकल्पित गांधीजी को भी गालियां और ड्रामेबाज ,तथा नोटंकी बाज आदि ऐसे अपशव्दों से नबाजना शुरू कर दिया है ! डॉ अम्बेडकर ने बुद्ध धर्म अंगीकार किया था !उनको मानने वाले कुछ दलितों ने भी बौद्ध धर्म स्वीकार किया ! किन्तु बे बौद्ध धर्म की अच्छाईयों को ग्रहण करने के बजाय अपने अज्ञान और मूर्खता का प्रदर्शन हिन्दू धर्म की लानत ,मलामत और गालियां देने में करते हैं ! हिन्दू कायरता की हद तक सहनशील है !इसीलिए वह कट्टरवादी मुसलमानो के आत्तंक से पीड़ित .प्रताड़ित होकर या तो अपना धर्म परिवर्तन कर लेता है !या फिर अपना घर और पैतृक निवास छोड़ कर पलायन कर जाते हैं !और ये डरपोक हिन्दू राजनैतिक स्वार्थ में संलग्न राजनैतिक सौदागरों से न्याय की आशा करते हैं !जो राजनेता तिलक ,तराजू ,और तलवार !इनको मारो जूता चार की प्रवर्तक और घोषणा करने वाले राजनैतिक दल और उसके नेता के चरण चुम्बन करने में भी परहेज नहीं करते हैं ! बल्कि गौरवान्वित अनुभव करते हैं !उन से न्याय की आशा करते हैं !ये सभी राजनैतिक दलों के बे स्वार्थ निष्ठ नेता हैं !जिन्होंने बसपा सुप्रीमो को अपनी बहन मानकर उनसे राखी भी बँधबाई ,उनके चरण स्पर्श भी किये !और राजनैतिक स्वार्थों के लिए उनकी हत्या करने के प्रयत्न भी किये ,और ये वही धर्म को कलंकित करने वाले लोग हैं .जो मुख्य मंत्री ,मंत्री ,कलेक्टर ,कमिश्नर ,और उच्चपदों पर आसीन दलितों के चरण छूते हैं ,उनके साथ उठने बैठने और उनका जूठा चाटने में भी गुरेज नहीं करते हैं !और गांव में रहने वाले दलतों को कुओं से पानी नहीं भरने देते हैं !मंदिरों में नहीं जाने देते हैं ,और उनके साथ पशुओं जैसा व्योहार करते हैं ! जो दलित धर्म परिवर्तन कर लेता है,उसको सम्मान देने लगते हैं !इन्ही स्वार्थनिष्ठ हिन्दू धर्म को कलंकित करने वाले लोगों ने दलितों में एक ऐसा बकवादी ,हिन्दुधर्म की उच्च धारणाओं को ना समझने वाले लोगों का समूह उत्पन्न कर दिया है !जो हिन्दू धर्म को गालियां देने को ही अपना महत्त्व पूर्ण कार्य समझते हैं ! और ये तथाकथित दलित नेता गाँधी जी को भी गालियां देते हैं!ये हरिजन शव्द को घोर अपमान जनक मानते हैं और दलित शव्द को बहुत सम्मान जनक मानते हैं !ये हरिजन शव्द की बहुत घृणित और अपमानजनक उत्पत्ति मानते हैं !किन्तु इन्होंने इस बात की जानकारी करने की कोई कोशिश नहीं की ! अपने को भंगी कहने वाले भंगी निवास में रहने वाले ,और अपने जीवन को अश्प्रस्यता समाप्त करने के संकलप को धारण करने वाले गांधीजी ने हरिजन क्यों कहा ?गांधीजी ने ११-२-१९३३ में हरिजन समाचार पत्र में ---- हरिजन क्यों ? शीर्षक से एक लेख लिखा था ! यह शव्द गुजरात के एक दलित संत ने सुझाया था ! उस समय हरिजनों के लिए अछूत शव्द का प्रयोग होता था !गांधीजी अछूत शव्द से घृणा करते थे ! गाँधी जी कहते थे जब सवर्ण हिन्दू अपने आतंरिक विश्वास से प्रेरित और वाध्य होकर स्वेक्छा से अश्पृश्यता को नष्ट कर देंगे तब हम सभी हरिजन कहलायेंगे !जब तक हिन्दू धर्म के इस कलंक का नाश नहीं होता है ! और जो लोग प्रत्यक्छ और अप्रत्यक्छ रूप से अश्पृश्यता का पोषण और क्रियान्बिन कर रहे हैं !बे चाहे इस से लाभ उठाने के लिए हिन्दू धर्म को गालियां देने वाले दलितों के हितों का नाश करने वाले और उनको दी जाने वाली सुविधाओं को भोगने वाले तथाकथित स्वार्थी अम्बेडकरवादी हों या दलितों के साथ पशुओं जैसा व्योहार करने वाले क्रूर हिन्दू हों !ये सभी क्रूर जन हैं !और समाज से बहिष्कृत किये जाने लायक हैं !
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