Wednesday, 6 July 2016

बहुत से स्त्री पुरुष भाग्य या परिश्थिति बस गलत रस्ते पर चले जाते हैं !किन्तु उनका अच्छाई का मूल स्वभाव उन गंदे कामों भी अच्छा बना रहता है !इसी प्रकार कुछ स्त्री पुरुष भाग्य या परिस्थिति के कारण जीवन में उच्च सम्मान पद पा जाते हैं ! किन्तु उनका मूल दुष्टता का स्वभाव का बदलता नहीं है !यहाँ जिन सेक्स वर्कर्स का उदाहरण दिया गया है ! जिन्होंने इस गंदे निकृष्ट धंधे में रहते हुए भी अपनी पुत्रियों को डॉक्टर इंजीनियर बना दिया ! यह इस बात का प्रमाण है ! कि उनका तन गन्दा हुआ ! किन्तु उनका मन हमेशा साफ़ स्वक्छ और सदाचार से युक्त रहा !हमारे धर्मग्रंथों में इस तरह के अनेकों उदहारण है ! जहाँ वैश्यायों ने वह परमगति प्राप्त की जोविवाहित महलाओं को भी प्राप्त नहीं हुई !रामचरित मानस की चौपाई इस तथ्य को प्रमाणित करती है !पायी ना केहि गति पतित पावन राम भज सुन शठ मना !गणिका अजामिल व्याध गीध अजादि खेल तारे घना !सोना नाली में गिरने के बाद भी सोना ही रहता है !और धूल स्वर्ण मुकुट पर चढ़ने के बाद भी धूल ही रहती है !व्यक्ति के चरित्र का आकलन उसके बाह्य कर्मों के साथ उसके आंतरिक भावों के साथ भी करना चाहिए !बल्कि आंतरिक भाव कर्म के स्थूल कर्म के स्वरुप की अपेक्छा अधिक महत्त्व पूर्ण होते हैं !

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