विश्व जनसंख्या दिवस -------- १०० मुर्ख पुत्रों से एक गुणवान पुत्र अच्छा होता है !क्योंकि आकाश में चमकने वाले हजारों तारागण अंधकार को नहीं मिटा पाते हैं किन्तु एक चन्द्रमा अन्धकार का नाश कर देता है !अगस्त ऋषि का लोपामुद्रा से विवाह हुआ था !लोपामुद्रा ने ऋषि से प्रार्थना की कि वह एक ऐसा गुणवान पुत्र चाहती है !जो योगयता में ,विद्वता में शक्ति और सामर्थ्य में लाखों बच्चों से श्रेष्ठ हो !भारत पुरातन काल से लोकव्यबस्था और भौतिक सुखों के लिए और आध्यात्मिक आनंद के लिए संख्या के स्थान पर योग्य संतानों को उत्पन्न करता रहा है!सृष्टि में सूअर ,और शीघ्र मरने वाले तथा व्यबस्था को कष्ट पहुँचाने वाले जीव जंतुओं और झाड़ियों ,झंकार का जन्म ही अधिक संख्या में होता है !इसीलिए ऐसे जीव जंतुओं और खर पतवार को नष्ट करने का उपाय करना पड़ता है ! कुछ जीव जंतु तो प्रकृति के विधान के अनुसार अल्प आयु होने के कारण स्वतः नष्ट हो जाते हैं !किन्तु खर ,पतवार को नष्ट करना पड़ता है !पृथवी जल ,अग्नि और वायु और आकाश की उत्पत्ति प्राणी जीवन के पूर्व ही हो जाती है !इनमें और जगत के प्राणियों में एक दूसरे से सहयोग करने की आवश्यकता श्रष्टि के संवर्धन ,संरक्छण के लिए आवशयक होती है !पृथवी में जीवों को धारण और पोषण करने की सामर्थ्य और शक्ति बनी रहे!इसीलिए सभी को न तो उस पर जनसँख्या का भार बढ़ना चाहिए !और ना ही प्राकृतिक संसाधनों /मिटटी ,पहाड़ ,जल ,जंगल को नष्ट और दूषित करना चाहिए !इस प्रकार इनका संरक्छण हम करेंगे और फिर हमारा पालन ,पोषण ये प्राकृतिक संसाधन करेंगे !अगर हम ऐसा नहीं करते है !और इन संसाधनीं का विनाश करते रहेंगे !और जनसँख्या में बृद्धि होती रहेगी !तो एक दिन कुदरत ही हमारा विनाश कर देगी !सभ्यता में पतन के लक्छण तो दृष्टि गोचर होने लगे हैं !भूकम्प ,सुनामी ,बर्षा का न होना ,मनुष्यों में बैर भाव होना ,अपने तुच्छ स्वार्थों की पूर्ति हेतु लोकव्यबस्था को नाश करना , और लोगों में धार्मिक उन्माद पैदा कर उनको आपस में लड़ाना और जनसँख्या बढ़ाना ,संवेदन हीनता ,अदि देश में दिखाई दे रहे है !मनुष्यों के कष्ट और परेशानियां ,निरंतर बढती जा रही हैं !स्वार्थों के घनघोर काले बादलों ने मनुष्यों को पशु बन दिया है !इसके बाद भी अगर हम सुधरते नहीं है !तो अगला कदम हमारे सर्व विनाश का होगा !और जैसे मोहन ,जोदड़ो ,हड़प्पा अदि पृथवी में समां गए हैं !उसी प्रकार हम भी जमीं दोज हो जायेंगे !
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