Thursday, 7 July 2016

में हिन्दू हूँ ,मुसलमान भी हूँ ,ईसाई भी हूँ ,बौद्ध --यहूदी --पारसी भेी हूँ ---संत विनोबा----- यह सामर्थ्य ,विचार और तदनुसार आचरण और जीवन जीने की कला और संस्कृति सिर्फ हिन्दू धर्म में ही है !फिर भी लोग हिन्दू धर्म और हिन्दुओं को गलिया देते हैं !हिन्दुओं ने कभी दूसरे धर्मों से धर्मांतरण नहीं कराया !और न ही हिन्दू साधु संतों और विचार शील हिन्दुओं ने कभी किसी दूसरे धर्म की अवमानना या निंदा की !हिन्दू धर्म से ही धर्मान्तरित होकर लोग ईसाई ,मुस्लमान और बौद्ध हुए !इसके बाद भी जो धर्मान्तरित होकर ईसाई हो गए बे ईसा की  सीख को नहीं मानते हैं  कि अपने दुश्मन से भी प्यार करो !जो  मुसलिम हो गए हैं !बे पैगम्बर मुहम्मद की सादगी ,सहनशीलता और भाई चारे पर ध्यान नहीं देते हैं !जो बौद्ध हो गए हैं बे बुद्ध की करुणा,प्रेम और त्याग को नहीं मानते हैं !ये तीनो हिन्दुओं से धर्मान्तरित हिन्दुओं को ही गलिया देते रहते हैं !और हिन्दुओं के धर्म से  परिवर्तित  कराने का षड्यंत्र अनेक प्रकारों से करते रहते हैं !इन लोगों ने हिन्दू धर्म को नष्ट करने का बीड़ा उठा रखा है !इन्ही के साथ कुछ हिन्दू भी शामिल हो जाते हैं !
            संत विनोबा ने हिन्दू धर्म की सर्व धर्म सम्भाव की इस प्राचीन परंपरा को अपने जीवन में उतारकर दीघर्काल तक अध्यन ,मनन ,चिंतन ,और प्रयोग कर संसार के भिन्न भिन्न धर्म ग्रंथों का सार निकाल कर प्रस्तुत किया !बे कहते थे कि मेरे जीवन के सभी काम दिलों को जोड़ने के एक मात्र उद्देश्य से प्रेरित हैं ! विनोबा जी कृत विविध धर्मग्रंथों और सन्त साहित्य के सार ग्रंथों में कुरान सार अपना विशेष महत्त्व रखता है !सामान्यतः कुरआन का सार यह कल्पना भी मुसलमानो के लिए सहज में स्वीकार नहीं हो सकती है !फिर भी मुसलमानों ने इस को प्रेम से स्वीकार किया था !मदीना और कराची  की किताबी दुनिया ने लिखा था ---- विनोबा जी की यह कृति जिसने रूहल कुरान का वेश परमात्मा की इक्छा से धारण किया है ,ना केवल इस्लाम की  अपितु दुनिया के इतिहास में एक स्मरणीय कृति कहलाएगी !इंशा अल्लाह -------- किताबी दुनिया ----२५ अगस्त १९६२ ! हिन्दुस्तान की भूमि पर विविध भाषायें एवं विविध धार्मिक विश्वास रखने वाले मनुष्यों के प्रचण्ड समुदाय को विनोबा जी ने कुरान की भेंट देकर जो कार्य पूर्ण किया है ,बे उसके लिए धन्य बाद के पात्र हैं !----करांची दिसम्बर १९६२!  मौलाना मसूदी ने कहा था -----२५ मौलवी १० साल बैठ करऔर दसों लाख खर्च करके भी जो काम नहीं कर पाते ऐसा यह कार्य हुआ है !कुरआन सार का अब तक मूल अरबी अरबी नागरी(हिंदी अनुबाद सहित ),उर्दू ,मराठी ,अंग्रेजी ,बंगाली ,गुजराती अदि विविध भाषाओँ में प्रकाशन हो चुका है ! विनोबा जी के कुरान के अध्यन का जब गांधीजी को पता चला तो बे प्रसन्न हुए और कहा कि ----- हम में से किसी को तो भी यह करना चाहिए था !विनोबा कर रहा है यह आनंद का विषय है !विनोबा जी ने अलफातिहा का मराठी में अनुबाद किया था जो सर्व धर्म प्रार्थना का अंग बन गया है !
मजहब  भिन्न भिन्न रूहानियत एक है -----अल्लाह को ना भूलना ,अल्लाह पर प्यार करना ,झूठ ना बोलना ,सच बोलना ----यह रूहानियत है ! रूहानियत सभी धर्मों में एक सी है !मजहब गलत हो सकते हैं ! .अलग ,अलग भी हो सकते हैं और अच्छे  और बुरे भीहो सकते हैं ! लेकिन रूहानियत गलत और बुरी नहीं हो सकती है  ! मजहब का मतलब है इंसान को रूहानियत की तरफ ले जाना ! लेकिन कुछ लोग रास्ता नहीं जानते हैं इसीलिए बे भटक जाते हैं !मजहब क्या करता है ?इंसान को अँधा समझ कर उसका हाथ पकड़ कर इधर चलो या उधर चलो ऐसे रास्ता बताता है ! यह गुरु है ,यह मुल्ला है इसके पीछे चलो ------- यह सब मजहब सिखाता है !रूहानियत एक दम रोशनी देती है !वह कहती है देखो तुम्हारे और अल्लाह के बीच में और कोई भी नहीं  है !मजहब कहता है ,अल्लाह के पास पहुंचना है तो बीच में कोई एजेंट चाहिए! !फिर चाहे वह पुरानी किताब हो या पुरानी मूर्ति  ! मंदिर में जाना हो  या मस्जिद में गुरु की बात सुनो या किताब की मजहब में किताब ,मंदिर मस्जिद यह सब आता है  !तो अल्लाह और इंसान के बीच पर्दा पड़ जाता है ! रूहानियत कहती है कि तेरा अल्लाह के साथ सीधा ताल्लुक है ,बीच में कोई एजेंट नहीं है  !मजहब और रूहानियत में यही प्रमुख भेद  हैं!

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