Wednesday, 27 July 2016

गांधीजी की हत्या करने वाला नाथूराम गोडसे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ा था या नहीं ?यह प्रश्न उतना महत्त्व पूर्ण नहीं है !महत्त्व पूर्ण यह है कि वह उस हिन्द्दु विचार से जुड़ा हुआ था ,जो गांधीजी को हिन्दू विरोधी और मुस्लिम समर्थक मानते थे ! तत्कालीन कांग्रेस में सभी विचार के लोग थे !और सभी मिलकर ब्रिटिश हुकूमत से हिंदुस्तान को आजाद करने के लिए संघर्ष कर रहे थे !उनमें से गांधीजीकीनीतियों और सिद्धान्तों का बहुत से लोग विरोध करते थे !किन्तु गांधीजी के चमत्कारी व्यक्तित्त्व के आगे बे सब परास्त हो जाते थे !कांग्रेस में जो कट्टर हिन्दू विचार धारा के पोषक थे ! बे गाँधी जी का विरोध करने का अवसर नहीं चूकते थे !इन्ही लोगों ने गांधीजी की हत्या का प्रयत्न उनकी हत्या के ४ बार पहले भी किया था  ! जिसमे   बे असफल रहे थे !पांचवीं बार उनको हत्या करने में सफलता प्राप्त हुई थी ! गांधीजी के रचनात्मक कार्यक्रमों में हिन्दू मुस्लिम एकता को महत्त्व पूर्ण स्थान प्राप्त था !बे जीवन के अंत तक हिन्दू धर्म और इस्लाम में एकता कायम करने का प्रयत्न करते रहे !किन्तु उनके इस प्रयत्न को ना हिंदुओं ने स्वीकार किया और ना मुसलमानो ने !हिन्दू उनको मुस्लिम परस्त मानते थे और मुसलमान उनको काफ़िर कहते थे !मुसलमानो के मसीहा और पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना गांधीजी को हिन्दू नेता ही मानते रहे !उन्होंने गांधीजी के इस दाबे को कभी स्वीकार नहीं किया था कि बे  भारत के सेवक हैं !और सभी धर्मों को समान रूप से आदर देते हैं !गांधीजी ने १९४४ के सितंबर माह में जिन्ना के मुम्बई स्थित माउंट प्लीजेंट रोड पर स्थित आवास पर १८ दिन तक चर्चा कर उनको मनाने की कोशिश की थी कि बे अपनी पकिस्तान की मांग को त्याग दें ! किन्तु जिन्ना ने गांधीजी की मांग को ठुकरा दिया था !इस वातचीत का भी हिन्दू बादी संगठनों ने घोर बिरोध किया था !गांधीजी की हत्या के बाद भी जिन्ना ने गांधीजी को श्रद्धांजलि हिन्दू नेता संबोधन करके ही दी थी ! गाँधी जी ने १३ जनबरी १९४८ को मुसलमानो के समर्थन में आमरण उपबास किया था !गांधीजी की हालात उपवास से अत्यंत नाजुक हो गयी थी! डॉक्टरों का कहना था कि गांधीजी की  म्रत्यु किसी भी समय हो सकती है !इसीलिए १८ जनबरी १९४८ को सभी संगठनों ने जिनमे हिंदूमहासभा आदि हिन्दुबादी संगठन  भी थे, ने गांधीजी की सारी 13 मांगें स्वीकार कर ली थी ! गांधीजी ने कहा था कि उनको धोखा मत देना !अगर बे सब दिल से मांगे स्वीकार करते हों तभी सहमति दें ,अन्यथा उन्हें मर जाने दें !देश के विभाजन के बाद गांधीजी जिन्दा लहाश रह गए थे !उनका आखरी प्रयत्न यह था कि बे देश का विभाजन तो नहीं रोकपाये थे !किन्तु अब मुसलमान और हिन्दू आपस में दंगा फसाद ना कर प्रेम से रहें !इसिलए उन्होंने मुसलमानो के पक्छ में आमरण अनशन किया था !बे चाहते थे की पहले हिंदुस्तान में शांति स्थापित करें फिर बे पकिस्तान में जाकर शांति और सद्भाव कायम करने का प्रयत्न करेंगे !और बे ८ फरबरी को करांची जाने वाले थे !किन्तु बे इसके पहले ही शहीद कर दीए गए ! गांधीजी की सहादत को राजनैतिक लाभ के लिए मुद्दा बनाया जा रहा है !किन्तु उनकी सहादत के असली उद्देश्य की और कोई भी राजनैतिक दल ध्यान नहीं दे रहा है !उनके जीवन  के ध्येय जिनके लिए उनकी सहादत हुई थी !उस हिन्दू मुस्लिम एकता की ओर किसीका ध्यान नहीं है !पकिस्तान ,बांग्लादेश में हिंदुओं पर अमानुषिक  अत्याचार हो रहे हैं !और बे वहां से पलायन कर रहे हैं !कश्मीरी पंडित अपने ही वतन में शरणार्थी है !हिंदुस्तान में आये दिन हिन्दू मुस्लिम दंगे और फसाद होते हैं ! और आज भी गांधीजी को मुसलमानो का समर्थक होने के नाम पर गांधीजी को गद्दार और देश द्रोहीकहा जाता है !और गोडसे को राष्ट्रभक्त कह कर उसके नाम के मंदिर बनाये जाने की बात की जाती है ! और कुछ बकवादी ,लोग अब गांधीजीकी हत्या के मामले को उठाकर राजनैतिक लाभ लेने की चेस्टा कर रहे हैं ! स्वार्थी अवसरवादी लोगों ने गांधीजी को जीवन भी शांति से नहीं जीने दिया और अब म्रत्यु  के बाद भी बे गांधीजी के नाम पर राजनैतिक रोटियां सेंकने की जुगत भूँजाने में लगे हुए हैं !

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