Tuesday, 19 July 2016

आज अवतारों, जगत्-गुरुओं, विश्वोपदेशकों ( World- teachers), सद्गुरूओं, ज्ञानियों, योगिराजों और भक्तों की देश में हाट लग रही है । ये सब दुर्लभ पद मोहवश आज बहुत ही सस्ते हो रहे हैं । ऐसे कई व्यक्तियों के नाम तो यह लेखक ही जानता है, जिनकी खुल्लमखुल्ला अवतार कहकर पूजा की जाती है और वे उसको स्वीकार करते हैं । पता नहीं, ईश्वर के इतने अवतार एक ही साथ देश में कैसे हो गये ? आश्चर्य तो यह है कि एक अवतार दूसरे अवतार को मानने के लिये तैयार नहीं है । ऐसी स्थिति में ये अवतार वास्तव में क्या वस्तु हैं ? इस बात को प्रत्येक विचारशील पुरुष सोच सकते हैं । गुरु तो गाँव -गाँव और गली-गली में मिल सकते हैं, सब कुछ गुरु चरणों में अर्पण करनेमात्र से ही ईश्वर -प्राप्ति की गैरंटी देनेवाले गुरूओं की कमी नहीं है; ऐसे हजारों नहीं, लाखों गुरु होंगे; परंतु दुःख है कि इन गुरूओं की जमात से उद्धार शायद ही किसी का होता है ।
जय श्री कृष्ण

No comments:

Post a Comment