आज अवतारों, जगत्-गुरुओं, विश्वोपदेशकों ( World- teachers), सद्गुरूओं,
ज्ञानियों, योगिराजों और भक्तों की देश में हाट लग रही है । ये सब दुर्लभ
पद मोहवश आज बहुत ही सस्ते हो रहे हैं । ऐसे कई व्यक्तियों के नाम तो यह
लेखक ही जानता है, जिनकी खुल्लमखुल्ला अवतार कहकर पूजा की जाती है और वे
उसको स्वीकार करते हैं । पता नहीं, ईश्वर के इतने अवतार एक ही साथ देश में
कैसे हो गये ? आश्चर्य तो यह है कि एक अवतार दूसरे अवतार को मानने के लिये
तैयार नहीं है । ऐसी स्थिति में ये अवतार वास्तव में क्या
वस्तु हैं ? इस बात को प्रत्येक विचारशील पुरुष सोच सकते हैं । गुरु तो
गाँव -गाँव और गली-गली में मिल सकते हैं, सब कुछ गुरु चरणों में अर्पण
करनेमात्र से ही ईश्वर -प्राप्ति की गैरंटी देनेवाले गुरूओं की कमी नहीं
है; ऐसे हजारों नहीं, लाखों गुरु होंगे; परंतु दुःख है कि इन गुरूओं की
जमात से उद्धार शायद ही किसी का होता है ।
जय श्री कृष्ण
जय श्री कृष्ण
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