महाभारत में शुलभा शाण्डिली सुवर्चला जैसी महान योगिनियों का भी वर्णन आया
है !और पतिब्रत धर्म का पालन करने वाली महान पतिब्रताओं के वर्णन में उनकी
दिव्य शक्तियों का वर्णन भी हुआ है !! कौशिक मुनि और पतिब्रता के सम्बाद
में पतिब्रता ग्रहणी के पतिब्रत धर्म के पालन से दिव्य शक्तियां प्राप्त
करने का आख्यान भी है !और पत्नी के प्रति अत्यंत आदरभाव से समर्पित पतियों
के चरित्र भी चित्रित हुए है !वास्तव में उस घर को घर नहीं कहते हैं !
जिसमे घरवाली न हो घरवाली का नाम ही घर है ! घरवाली के बिना
घर जंगल केसमान होता है ! पुत्र पौत्र पतोहू तथा अन्य भरण पोषण के योग्य
कुटुम्बी जनो से भरा होने पर भी गृहस्थ का घर उसकी पत्नी के बिना सूना ही
रहता है ! पुरुष के धर्म अर्थ काम के अवसरों पर उसकी पत्नी ही उसकी मुख्य
सहायिका होती है ! परदेश जाने पर भी वही उसके लिए विश्वसनीय मित्र का काम
करतीहै ! संसार में जो अशहाय हैं उसे भी लोकयात्रा में सहायता देने वाली
उसकी पत्नी ही है ! संसार में स्त्री के समान कोई बन्धु नहीं है ! स्त्री
के समान कोई आश्रय नहीं है ! और स्त्री के समान धर्म संग्रह में सहायक भी
दूसरा कोई नहीं है ! जिसके घर में साध्वी और प्रिय बचन बोलने वाली भार्या
नहीं नही है ! ,उसे तो बन में चले जाना चाहिए क्योँकि उसके लिए जैसा घर है !
वैसा ही बन है !पुरुष की रति, प्रीति और संतति की प्राप्ति स्त्री के ही
अधीन है ! ये भी और अन्य बहुत सी महत्त्व पूर्ण बातें भीष्म पितामह द्वारा
युधिस्ठर को स्त्री के सम्बन्ध में महाभारत में बतायीगयी हैं !
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