Thursday, 28 July 2016

बारिश का पानी व्यर्थ बह रहा है --------- बुंदेलखंड तीन साल से भयानक सूखे से प्रभावित था ! पानी आवश्यकता से काफी काम वर्षा था !किन्तु ऐसा नहीं था की बारिश बिककुल हुई ही न हो ! इस समय भी अच्छी बारिश हो रही है !नालियां चोक हैं !कुछ नालों पर लोगों ने निर्माण कर लिये हैं !इस से पानी की निकासी बंद होने से घरों में पानी भर जाता है !सारी नदियां और बाँध उफन रहे हैं !कुछ जिलों में बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है !फिर भी तालाब सूखे  पढ़े हैं ! कुओं में  पानी नहीं हैं !हैण्ड पंप भी पानी नहीं दे रहे हैं !कस्बों में टैंकरों से पानी नागरिकों द्वारा खरीदा जा रहा है ! एक ओर यह स्थिति है !दूसरी ओर बरसात का पानी व्यर्थ बह रहा है !अगर सरकार यह प्रबंध कर लेती कि बरसात के जल से सारे तालाब और पोखरे भर दिए जाते तो बुंदेलखंड में सूखे की समस्या से निजात पायी जा सकती थी !बुंदेलखंड में तालाबों और पोखरों की भरमार थी ! किन्तु  अधिकांश तालाब अब समाप्त हो गए हैं !और कुओं को मूंद दिया गया है ! ये सब जब  ठीक थे !तब इनसे  जल की स्थाई पूर्ति होती थी ! जल ही जीवन है !इस को बताने के लिए अनेक कार्यक्रम होते रहतेहैं !और नागरिकों को सलाह दी जाती है !कि जल की प्रत्येक बून्द की सुरक्छा की जाय !इन तथाकथित भाषण देने वालों से अधिक चिंता सृजन हार को है जिसने यह श्रष्टि निर्माण की है !इसीलिए उसने पर्याप्त जल की व्यबस्था की है !किन्तु उस जल को संरक्छित और सुरक्छित करने का कार्य नहीं किया गया !परिणाम स्वरुप सूखे और बाढ़ की समस्याएं उत्पन्न होती रहती हैं !यदि भविष्य में भी प्रकृति द्वारा जरुरत से ज्यादा बरसात के रूप में दीये गए जल का प्रबंधन नहीं किया गया !तो हमको सूखे और बाढ़ से मुक्ति मिलना संभव नहीं है !

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