भारत धर्म निर्पेक्ष देश है इसलिए यहां वैदिक धर्म में अनादिकाल से पोषित
भूमि पूजन आदि का पालन किसी नए कार्य का प्रारम्भ करने के लिए सरकारी
कार्यों में प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए यह ओवेसी का कथन है वह कहते है इस
से धर्म निरपेक्सता समाप्त होती है तथा साम्प्रदायिकता बढ़ती है अधिकांश
मुस्लिम राष्ट्र धर्म निर्पेक्ष नहीं है वहां इस्लाम में जिस धार्मिकनियम
के पालन पालन की आज्ञा नहीं है ऐसी किसी धार्मिक विधि का पालन नहीं करने
दिया जाता है कोई मंदिर चर्च या पूजा गृह का निर्माण नहीं
कर सकता है पाकिस्तान बांग्ला देश में भी हिन्दुओं पर भीषण अत्याचार
संपत्ति की लूट हत्या जबरन धर्म परिवर्तन बलात्कार आदि की घटनाएँ रोज
समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती है ओवेसी आजम ऐसे मुसलमान यह शान से
कहते है की बे पहले मुसलमान है बाद में भारतीय है में यह जानना चाहूंगा
क्या मुसलमान धर्म निर्पेक्ष हो सकता है ?कौनी इस्लाम में पवित्र कुरान को
अल्लाह की किताब मन जाता है और उसमे जो कहा गया है उसके अतिरिक्त किसी और
धर्म में वर्णित धार्मिक नियमो का पालन करने पर उसे इस्लाम से ख़ारिज कर
दिया जाता है ऐसे इस्लाम से ख़ारिज किये सलमान खान शाहरुख़ खान आदि बहुत से
मुसलमान हिंदुस्तान में तथा विश्व में अन्य देशों में भी हैं मुझे लगता है
समूह रूप में हिन्दू हिट की बात करना साम्प्रदायिक नहीं मन जाना चाहिए
१५००वर्श तक गुलामी के कारण पूरी तरह से टूट गया यह हिन्दू समाज जिसको
तोड़ने का काम अब अगड़े पिछड़े दलित आदि में निजी स्वार्थों के कारण नेता लोग
कर रहे हैं मुझे पता नहीं हैं की बे जिस डाल पर बैठे हैं उसी को काट रहे
है ऐसा अहसास उन्हें है या नहीं ?में कट्टर हिन्दू धर्म का समर्थक नहीं हूँ
किन्तु धर्म सुरक्षित रहे यह चिंता जरूर है
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