Tuesday, 1 December 2015

असहनशीलता ------ भारत में प्राकृतिक  विविधता के कारण आचरणगत विविधता भी अनादि काल से है !यह एक ऐसा देश है जिसमे सम्पूर्ण विश्व का दर्शन होता है ! और इसी देश में विश्व के निर्माता और सम्पूर्ण श्रष्टि के पालक पोषक और संघार कर्ता ईश्वर  का भी विविध रूपों और स्वरूपों में अवतार हुए हैं !सभी  प्रकार के आस्तिक नास्तिक , आत्मा ,परमात्मा को स्वीकारने और अस्वीकारने  वाले लोगों और पुनर्जन्म के मानने वाले और ना मानने वाले धर्मों का भी स्वागत इस भारत भूमि में हुआ है !जिस प्रकार प्राकृतिक विविधता इस महान देश की सुंदरता और गौरव गरिमा की बृद्धि करती  रही इसी प्रकार यह धार्मिक और आचरणगत विविधता भी इस देश की विशेषता रही !अब स्थिति बदल गयी है !अब यह विविधता जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम करने लगी है ! जीवन के सभी छेत्रों में यह विविधता अब तोड़ने का काम कर रही है !और इसकेरूप स्वरूपभी बहुत संकीर्ण होते जा रहे हैं !हिंन्दु मुसलिम सिख ईसाई जैन बौद्ध और पारसी आदि के नाम से विविधता के कारण देश की अखंडता बिखंडता में परिवर्तित करने का प्रयत्न दृष्टिगोचर होता है !अब अगला ,पिछड़ा सवर्ण दलित अति दलित अति पिछड़ा आदि भी तोड़ने का काम कर रहे हैं !देश में जातियों के छोटे छोटे ग्रुप भी सक्रिय दिखाई देते हैं !और कुछ धार्मिक गठबंधनों कीपद्धति भी विकसित हो गयी है !सारे देश में किसी न किसी नाम से देश को तोड़ने की तमाम एजेंसियां कार्य रत हैं !उसीका परिणाम यह असहनशीलता हैं !इसका सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र राजनीति है! जो राजनेता पद प्रतिष्ठा धन संपत्ति आदि वैभव प्राप्त करने के लिए इस विविधता का दुरपयोग  कर रहे हैं !बे ही लोग असहनशीलता पर बहस भी कर रहे हैं !और इसको समाप्त करने की बजाय इसमें बृद्धि कर रहे हैं !जिस प्रकार से वरसात के पानी के अभाव में कृषि सूख जाती है !उसी प्रकार असहनशीलता के विनाश से राजनेताओं की इस विभाजन और बिघटनकारी राजनीति का विनाश हो जायेगा और उनका वैभव और पद प्रतिष्ठा का विनाश भी  हो जाएगा !अन्धे को भी राजनेताओं की राजनैतिक सफलता की पृष्ठ भूमि में यह बात साफ़ समझ में आसकती है !अगर कोई गम्भीरता से  इस पर विचार करके इस पर दृष्टि पात करे तो समझ में यह बात आ जायेगी  !चुनाव में एक मुद्दा विकास का होता है !विकास राजनेताओं का होता है !एक मुद्दा धार्मिक सद्भाव का होता है !उसमे हिन्दू मुसलिम गठ बंधन का होता है !कहीं हिंदुत्तव का होता है !कहीं जिस धर्म के लोगों का बाहुल्य होता है उनका साथ पाने के प्रयत्न में होता है !जाति प्रथा के विनाश की बात होती है !उसके लिए अगड़ा पिछड़ा दलित आदि के नाम पर वोट प्राप्त करने की चेस्टा की जातीं है !और जाति प्रथा को मजबूत किया जाता है !इस प्रकार लोकतान्त्रिक पद्धति में उन गुणों का नाश कर दिया जाता है !जिन्हे ईमानदारी देशभक्ति त्याग सेवा आदि नामों से जाना जाता है !इसीलिए इन राजनैतिक निम्न स्वार्थों के रहते देश में असहनशीलता अभी और विकसित होगी !और यह जबतक क्रियाशील और विकसित होती रहेगी जब तक लोगों को इन राजनेताओं के छुद्र स्वार्थों को  समझ कर नष्ट करने की प्रवृत्ति का जन्म नहीं होगा !



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