Wednesday, 9 December 2015

भारत अनादि काल से आत्मज्ञान का केंद्र रहा है !श्रष्टि के निर्माता और नियंता ने b इस भूमि कोजो सौंदर्य और प्राकृतिक  संसाधन प्रदान किये हैं ! बे  विश्व के किसी भी देश को प्राप्त नहीं हैं !यहाँ परमात्मा भी भिन्न भीं रूपों में अवतरित होते रहे हैं !मनुष्य जीवन का अंतिम ध्येय मोक्ष की प्राप्ति है !इसी को केंद्र में रख कर यहाँ के सन्यासी साधु गृहस्थ राजे महाराजे और धन सम्पदा से संपन्न धनिक भी अपना जीवन जीते रहे हैं !यह वह पवित्र भूमि हैं जहाँ राजा भी राजऋषि होते थे !इस देश में भौतिक समृद्धि की विपुलता भी आत्मबल से प्राप्त होती थी !  धार्मिक आचरण की पूर्णता निःश्रेयस की प्राप्ति और भौतिक समृद्धि  के दर्शन इसी भारत भूमि में प्रत्यक्छ  दिखाई देती थी ! इस देश में स्वक्छ और निर्मल जल से युक्त अत्यंत पवित्र गंगा जमुना नर्बदा कावेरी विपासा झेलम धसान बेतवा सरस्वती आदि जैसी सहस्त्रों छोटी बड़ी नदियां बहती थी !यहाँ हिमालय विंध्याचल नीलांचल  गन्धमादन जैसे महान और छोटे बड़े सेकंडो पर्वत विद्यमान थे ! और अभीभी हैं !यहाँ के जंगल अनेक प्रकार के स्वादिष्ट फलों के ब्रक्छोँ  से सुशोभित होते थे !सभी प्रकार के  पक्छियोँ के कलरव गान से गूंजते रहते थे !ऋषियों केआश्रम इन्ही बनो में नदियों के किनारे स्थापित थे !ये सभी आश्रम स्वाबलम्बी होते थे !किसी राजा या धनवान के दान से नहीं चलते थे !तपस्या के प्रभाव से जो शक्ति इन आश्रमों मेंविराजती थी !उस शक्ति को प्राप्त करने के लिए राजा इन ऋषियों के शरणागत होकर इनका आशीर्बाद प्राप्त करते थे !यहाँ जो वायु बहती थी वह ऋषियों की तपस्या से संयुक्त होकर बनो से सुगन्धित पुष्पों की गंध लेकर सहज में ही सामान्य व्यक्तियों को भी समाधिस्थ कर देती थी !कैलाश पर्वत तो भगवान शिव का बास स्थान है !किन्तु इस समय इसके कुछ  भू भाग पर चीन का अधिकारहै !इसीलिए इसकी धार्मिक यात्रा के लिए चीन से अनुमति प्राप्त करनी पड़ती है !यद्द्पि कैलाश यात्रा अब पहले से भारतीय प्रधान मंत्री के प्रयत्न से अधिक आसान हो गयी है !प्रत्येक बर्ष  धर्म यत्री इस यात्रा पर जाते हैं !और कैलाश पर्वत का मनोहारी दर्शन करते हैं !और प्राकृतिक सम्पदा से युक्त दृश्यों का अवलोकन कर पवित्र झील मानसरोवर में स्नान करते हैं !और भगवान शिव के इस  स्थान का दर्शन कर पुण्य और आत्मशांति प्राप्त करते हैं !इन पुण्य स्थलों के कारण ही भारत भूमि पुण्यभूमि कहलाती हैं !इस भूमि के कण कण में त्याग तपस्या भक्ति ज्ञान और निष्काम कर्म की तरंगें गूँजती रहती हैं !

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