Saturday, 5 December 2015

डॉ आंबेडकर  और गांधीजी -------सत्ता रूढ़ होने की आकांछा से ग्रस्त और लोकतंत्र की रफ़्तार में वाधा उत्पन्न करने वाले कुछ दलित जो आजकल डॉ आंबेडकर की प्रतिभा और प्रयत्न से तथा गांधी जी के अस्पृस्यता  उन्मूलन के आजीवन कार्य से नेता बन कर और आरक्छण का लाभ उठाकर अपने परिवार पोषण और धन संपत्ति के संग्रह में लगे हुए हैं ! और दलित हित पोषण के नाम से दलितों के महान शत्रु हैं ! और अपने भोग विलास की बृद्धि के लिए भारतीय समाज में समरसता का नाश कर रहे हैं !गांधीजी और डॉ आंबेडकर के विवेक और नीति प्रधान विचार विरोध को सही दृष्टि से स्वीकार ना कर गांधी जी को दलित विरोधी और नौटंकी बाज कहते हैं ! ये वह दलित हैं जिनके लिए आंबेडकर ने कहा था ! इन लोभ और अवांछनीय इक्छाओं की पूर्ति में लगे हुए दलितों  ने मुझे धोखा  दिया है ! और मेरे साथ विश्वास घात किया है !गांधी जी की दृष्टि में डॉ अम्बेडकर वैचारिक मतभेद के बाद भी हमेशा सम्मान के पात्र रहे ! डॉ आंबेडकर दलित जाति में जन्म लेने के कारण दलितों के उत्थान के लिए समर्पित रहे ! और गांधी जी सवर्ण होते हुए भी जीवन भर भंगी कार्य करते रहे  !और दलितों का जीवन उनके साथ आत्मीयता और उनके उत्थान के लिए उनके बीच रहकर उनका ऐसा ही जीवन जीते रहे ! उन्होंने राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में १९३१ में लंदन में  अपनी जाति भंगी और अपना पेशा  जुलाहा बताया था  !जो काम उच्चकोटि की शिक्छा प्राप्त और दलित जाति में उत्पन्न दलितों के मसीहा डॉ अम्बेडकर पाखाना साफ़  करने का नहीं कर सके वह काम पाखाना साफ़ करने का गांधी जी ने जीवन भर किया


और  अपने आश्रमों में विनोबा जैसे  महान संत और राजकुमारी अमृतकौर और विदेशी ,देशी सभी आश्रम वासियों से कराया ! आज भी गांधी विचारनिष्ठ व्यक्ति सभी इस कार्य को करते हैं ! गांधी  आश्रमों में जाति धर्म आदि का पूरी तरह आचरण में नाश हो गया है !
--------------स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर जब नेहरूजी अपनी अंतरिम मंत्री परिषद के गठन में संलग्न थे ! गांधी जी ने नेहरूजी से डॉ आंबेडकर को अपने मंत्रिमंडल में कांग्रेस का सदस्य  ना  होने के बाद भी सम्मिलित कराया था ! और वह भारत के प्रथम कानून मंत्री और संविधान का प्रारूप तैयार करने वाली समिति के अध्यक्छ नियुक्त किये गए थे  !परिणाम स्वरुप डॉ अम्बेडकर को दलितों के हित में कामकरने के पर्याप्त अवसर गांधीजी की सहायता से ही प्राप्त हुए थे ! परिणाम स्वरुप बे दलितों के हितों को कानूनी स्वरुप देने में सफल हुए 1 और कानून मंत्री रहते हुए कांग्रेस के सहयोग से हर प्रकार की अस्पृस्यता  पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्ध लगा सके थे ! आजादी के बाद भारत में कांग्रेस का आश्चर्यजनक प्रभाव था ! आजकल के दलित नेताओं को कांग्रेस के दलितंहित में किये गए गांधीजी के प्रभाव और अस्पृस्यता उन्मूलन के इस कार्य को नजर अंदाज  नहीं करना चाहिए 1
-------------------------------धनजय  कीर जो डॉ अम्बेडकर की आत्मकथा के लेखक है  !और जो डॉ आंबेडकर को आधुनिक मनु कहते हैं ! ने लिखा है कि एक अस्पृस्य  व्यक्ति जिसे अपने बचपन में दुत्कार कर गाड़ी से उतार दिया गया था ! और स्कूल में अलग बिठाया गया था  ! जिसकी एक प्राचार्य के रूप में अवमानना हुई थी ! .जिसे छात्रावास , भोजनालयों ,नाइकी दुकानो,और  ,मंदिरों से बेदखल किया गया हो ! और जिसे अंग्रेजों के पिट्ठुओं के रूप में धिक्कारा जाता रहा हो ! उन डॉ अम्बेडका को अब एक स्वतंत्र देश का प्रथम कानून मंत्री और उसके संविधान का प्रथम शिल्पी गांधी जी के प्रभाव से कांग्रेस ने बनाया था ! यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है ! और भारतीय इतिहास का एक बहुत बड़ा चमत्कार था ! तथाकथित दलित नेताओं के गांधीजी के इस योगदान को नकार कर कृतघ्नता से बचना चाहिए ! और स्वयं के विलासपूर्ण जीवन को अंकुश में रखकर गांधी जी के त्यागपूर्ण जीवन का  अनुसरण  कर और डॉ आंबेडकर की प्रतिभा को धारण कर दलित समाज को स्वाबलंबी, आत्मनिर्भर और सम्मान से युक्त करने का प्रयत्न करना चाहिए !डॉ अम्बेडकर की कोरी शव्दिक प्रसंशा और गांधी जी और अम्बेडकर के वैचारिक  मतभेद  को बढ़ाचढ़ाकर पेश करने से दलितों के उत्थान की रफ़्तार रोकने की चेस्टा नहीं करनी चाहिए  !

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