Monday, 7 December 2015

गीता भारत का ग्रन्थ राज है जिसमे किसी भी धर्म की पूजा इत्यादि पद्धति नहीं है यह विशुद्ध आध्यात्मिक ग्रन्थ है जिसमे जीवन जीने की कला बताई गयी है गीता जीवन योग है इसका प्रचार प्रसार आध्यात्मिक ग्रन्थ के रूप में सारे विश्व में हुआ है इस पर महान साधु संतो सन्यासिओं के अतिरिक्त तिलक गांधी अरविंदो विनोबा भावे डॉक्टर राधाकृष्णन आदि महान भारतीओं के अतिरिक्त एडविन अर्नाल्ड आदि विदेशिओं ने भी भाष्य लिखे है इस श्रेस्ठ ग्रन्थ का दुर्भाग्य यह है की यह ज्ञान भारत भूमि में हुआ है इसलिए उसको लोक में वह सम्मान नहीं दिया जा सकता है जिसका राष्ट्र हित में दिया जाना आवश्यक है हलाकि सरकार और राजनेताओं की और से भले ही यह राष्ट्रिय ग्रन्थ न हो किन्तु ज्ञान दृष्टि से तो यह राष्ट्रीय ग्रन्थ है ही जो लोग इसको राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किये जाने का विरोध कर रहे हैं हो सकता है उन्होंने इस ग्रन्थ को पड़ा न हो और अगर पड़ा भी हो तो हो सकता है समझा न हो और समझा भी हो तो वोटों की खातिर समझ कर भी इसका विरोध कर रहे हों कुछ भी हो भारत में जन्मे इस ज्ञान की अवमानना होरही है

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