अगर सेंसर बोर्ड ने हिन्दू वादी संघठनो की तथा धर्माचार्यों की मांग फिल्म
से विवादास्पद दृश्यों को निकालने की बात मान ली होती तो कई दिनों से चला
आरहा यह आंदोलन उग्र हो कर तोड़ फोड़ में तब्दील नहीं होता अभी भी मांगे
स्वीकार करने से स्थिति और बदतर होने से रोकी जा सकती है धर्म के मामले में
लोगों की आश्था जुडी होती है इसलिए जब विरोध शरू हो जाता है तो बहुत से
लोग धर्म के लिए बिना कुछ सोचे समझे विरोध में शामिल हो जाते हैं धर्म में
अधर्म और अंधश्रद्धा कोई नयी बात नहीं है सभी धर्मों में
यह है किन्तु धर्म का कोई विकल्प नहीं है न ही धर्म को समाप्त किया जा
सकता है और धर्म के विरोध की इज़ाज़त उन लोगों को तो विल्कुल ही नहीं दी जा
सकती है जो खुद बिगड़े हुए है और धर्म में पाखंड अन्धविश्वास दिखा बताकर
स्वार्थ की रोटीआं सेंकते है और रुपया कमाते है इसलिए यह ठीक होगा की
फिल्म से हिन्दू धर्म को अपमानित करने वाले सीन निकाल दिए जाय नहीं तो
विरोध और भी उग्र हो सकता है
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