Tuesday, 1 December 2015

 समाज व्यबस्था को सुचार रूप से संचालित करने केलिए मनुस्मृति का जन्म हुआ था !मानव समाज को व्यबस्थित करने के लिए यह पहली विधान की पुस्तक है !जिसमे धर्म अर्थ काम और नीति का के वर्णन के साथ आचरण विधि का भी वर्णन किया गया है !इसमें बहुत सा विधान वर्णाश्रम के अनुसार है !किन्तु धीरे धीरे युग परिश्थिति और काल क्रम से वरुणाश्रम धर्म  में दोष उत्पन्न होने लगे !परिणाम स्वरुप युग के अनुसार और भी स्मृतियाँ भी लिखी जाने लगी थी  !इसीक्रम में याग्यवल्क्य  स्मिृति ,शुक्र नीति ,बृहस्पति स्मिृति  कौटल्य का अर्थशाश्त्र आदि १०८ स्मिृतियों  का निर्माण हुआ !राजतन्त्र की समाप्तिके बाद अब लोकतंत्र की स्मृति हमारा संविधान है !यही हमारा विधान शाश्त्र है !और इसी के द्वारा जनता के सभी प्रकार के आचरणों का नियमन और नियंत्रण होता है !मनुस्मृति के बहुत से प्रावधान संविधान में है !और बहुत से प्रावधान हटा दिए गए हैं !डॉ अम्बेडकर जो संविधान निर्माण समिति के चेयरमैन  थे मनुस्मृति के कुछ प्रावधानों के कट्टर विरोधी थे !और आज भी उनकी विचारधारा के राजनैतिक समर्थक मनुवाद का तीब्र विरोध करते हैं !राजस्थान हाई कोर्ट के प्रांगण में कानून के आदि निर्माता मनु का स्टेचू बना हुआ है !उसका भी विरोध इसी विचार धारा के लोग किया करते हैं !भारत लम्बे समय तक गुलाम रहा है !इस दौरान वैदिक धर्म को लांछित और अपवित्र करने के लिए वेदिकधर्म द्रोहियोँ ने इस धर्म के ग्रंथो में बहुत सी मनगढंत बातों का प्रवेश करा दिया है !यह मनु स्मृति के साथ भी ऐसा  हुआ है !उसी विकृत मनुस्मृति के कारण डॉ अम्बेडकर इस स्मिृति के विरुद्ध हो गए थे !मनु स्मृति के काल परिश्थिति और समय के अनुसार कुछ सिद्धांत आज भी आचरण में उतारे जा सकते हैं !

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