देश की सभी समस्यें सिर्फ देश की सुरक्षा को छोड़कर हल हो जाएँ हम में से
नेता बने लोगों ने अपने लिए सुख सुविधा संपत्ति पद की जितनी प्राप्ति की
है यदि इतने पर ही रुक जाएँ और आगे न बढ़ें यही उनकी बड़ी कृपा होगी क्योँकि
अब तक जो बर्बादी देश की वह कर चुके हैं वह संसद से लेकर गाओं सभा तथा
कर्म चरिओं अधिवक्ताओं अध्यापकों व्योपारिओं छात्र संघो आदि तक के चुनाओं
तक में प्रवेश कर गयी हैऔर सेवा तथा रचनातमक दृष्टि समाप्त हो गयी है जिस
तरह से कमीशन खोरी और परिवारवाद का प्रचलन तथा चुनाव जीतने
के लिए जाति का सहारा तथा धार्मिक सम्प्रदाय बाद का विस्तार किया गया है
उस से देश की जनता को नारकीय स्थिति में धकेल दिया है चारों तरफ देश की
नैतिक तथा कर्त्तव्य पालन की वृत्ति का नाश करने वाले युवाओं से लेकर
बुजुर्ग नेताओं की भीड़ दिखाई देती है अधिकारी कर्म चारी सुख का भोग
देशवासिओं को नारकीयजीवन प्रदान कर भोग रहे है जिस किसान के पास ५एकर जमीन
है उसकी आय भी १लाख रूपए बार्षिक नहीं है जबकि चपरासी की आय १लाख रुपये
से अधिक है कर्म चरिओं का वार्षिक वेतन लाखों में है और अधिकारिओं का तो
मासिक बेतन लाख रूपए से अधिक है किन्तु चपरासी से लेकर अधिकारी तक को इतना
मोटा बेतन पाकर संतोष नहीं है बे कोई भी काम बिना रिश्वत लिए नहीं करते है
अपने ही देश वासिओं की गरीबी देख कर उनका दिल नहीं पसीजताहै कमीशन लेकर
योजनाओ का भी सत्यनाश करते है नेताओं अधिकारिओ कर्मचारिओं का सुधार कानून
नहीं कर सकता है यह तो उन्हें अपनी अंतरात्मा जगा कर खुद करना होगा
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