Thursday, 10 December 2015

समावेशी जनतंत्र -------दैनिक जागरण   ने जागरण फोरम के द्वारा इस महत्त्व पूर्ण विषय पर चर्चा आयोजित की जिसमे देश के प्रधान मंत्री से लेकर राज्योँ के मुख्य मंत्रियों आदि राजनैतिक नेताओं ने और जागरण फोरम के द्वारा समझे जाने वाले  बुद्धि जीवियों और विचारकों ने हिस्सा लिया ! जंततंत्र को सर्व समावेशी होना ही चाहिए !क्योंकि जनतंत्र का जन्म ही जनता के द्वारा होता है !अगर सर्व का  समावेश जनतंत्र में नहीं है !तो वह मुर्दा जनतंत्र है !क्या भारतीय जनतंत्र में ६८ साल की स्वतंत्रता के बाद भी सर्व का समावेश नहीं हो पाया है ?क्या देश में मुर्दा लोकतंत्र चल रहा है ?क्या इस सम्बन्ध में पूर्व की सरकारों ने कोई प्रयत्न नहीं किये ?क्या संसद कीकार्यबाही  पहले कभी बाधित नहीं हुई ?क्या  संसद मनोतंत्र और मनी तंत्र से चलती रही है ?संसद में मनोतंत्र और मनी तंत्र के प्रभाव का विकास होते होते आज चरम पर पहुँच गया है  ?क्या देश के समाचार पत्र और चैनल्स सर्व समावेशी लोकतंत्र का विकास कर रहे हैं .उसमे सहयोग कर रहे हैं ?या सभी लोग सर्व समावेशी जनतंत्र का नाम लेकर अपने निम्न स्वार्थोँ की सिद्धि कर रहे हैं ?और इन सभी चर्चाओं का परिणाम जो संसद से लेकर समाचार पत्र द्वारा आयोजित फोरमों पर होता है और हो रहा है  के परिणाम शून्य आ रहे हैं ?आदि आदि !इस समय दोषों का बल बढ़ रहा है और अच्छे गुण दब रहे हैं ! इसलिए दोषों को दबाने की आवश्यकता है ! और उत्तम गुणों के विकास की आवश्यकता है ! सबसे बड़ा दोष है लोभ  उसी से प्रेरित हो कर लोग नहीं करने वाले काम भी कर रहे हैं ! लोभ  के बश में पड़े हुए लोग नीच कर्म करने की और दौड़ते हैं ! लोभ से तृष्णा का जन्म  होता होता है !  लोभ और तृष्णा दोनों महान दुर्गुण एक दूसरे का पोषण और संवर्धन करते हैं ! लोभी मनुष्य जब राजनीति और समाज के महत्त्व पूर्ण छेत्रों में प्रवेश कर राष्ट्र के नियामक और कर्णधार बन जाते हैं तब बे अपने शरीर की पूजा और प्रतिष्ठा में लगे रहकर सद्गुणों की बातें और दुर्गुणों का विकास करते हैं ! इसलिए इस लोभ के स्वरुप को अच्छी तरह समझ कर इसे धैर्यपूर्वक दबाने और निस्वार्थ  भाव के विकसित करने की आवश्यकता है ! इसी से बास्तविक समावेशी जनतंत्र का उदय होगा! और  तभी  वास्तविक सर्व समावेशी लोकतंत्र की प्राप्ति होगी !

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