भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राजनेता एक दूसरे पर प्रहार करते रहते हैं !और सभी राजनेता राजनीति में भ्रष्टाचार से पोषित होकर ही गाओं सभा से लेकर संसद तक पहुँचने की अपनी यात्रा पूरी करते हैं !तथा प्रधानमन्त्री से लेकर गाओं सभा के प्रधान तक की प्राप्ति भी भ्रष्टाचार के द्वारा ही प्राप्त करते हैं !भ्रष्टाचार का यह दौर अभी थमेगा नहीं ! राजनेताओं के भ्रष्टाचार ने जीवन के सभी छेत्रों शिक्छा स्वास्थ्य ,न्याय, व्योपार ,अधिकारीयों आदि में प्रवेश करा दिया है !बर्तमान भारत में सभी प्रकार का मान सम्मान पद प्रितिष्ठा भ्रष्ट लोगों को ही प्राप्त है !भ्रष्टाचार आचरण में ग्राह्य किन्तु शव्दों में बहिष्कृत है ! भ्रष्टाचार जन सहयोग से संचालित हो रहा है !इसका खुला दर्शन चुनाव में होता है !और छिपा हुआ अनुभव अधिकारियोँ और कर्मचारियों से जब किसी का संपर्क होता है तब !आता है !जैसे बीमारियों के विविध रूप है !ऐसे ही भ्रष्टाचार भी देश में विविध रूपों स्वरूपों में विद्यमान है ! सभी प्रकार के भ्रष्टाचार के केंद्र में रुपया की प्राप्ति ही महत्त्व पूर्ण है !जिनके पास वैधानिक अवैधानिक ढंग से प्राप्त रुपया है !उनको सभी प्रकार के भौतिक सुख प्राप्त हैं !और जिनके पास रुपया नहीं है !वे जीवन की जरुरी आवश्यकताएं भी पूरी नहीं कर पा रहे हैं ! !जबकि रुपया सरकारी प्रेस में छपता है !और इसका आंतरिक मूल्य शून्य है !इसीलिए इस रूपया के संग्रह और उपार्जन में संलग्न व्यक्तियों का भी आतंरिक मूल्य शून्य है !भ्रष्टलोग फूले हुए गुब्बारे के समान है !जिनका आकर बड़ा है किन्तु बजन कुछ भी नहीं है !रूपया उपार्जन में लगे ये अन्धभक्त रूपया के संग्रह में लगे हुए हैं !इनकी दृष्टि रूपया से प्राप्त होने वाली भ्रष्ट सेवाओं और मिलाबटी खाद्य पदार्थों की और नहीं है !भ्रष्ट लोग उस डाल को काट रहे हैं जिस पर ये बैठे हैं !भारत धार्मिक देश हैं !यहाँ जब जब राक्छ्सिओं और दैत्यों से जनमानस पीड़ित हुआ है !भगवान स्वयं अवतरित होकर उनका विनाश करते हैं !भ्रष्टाचार के दानव का अंत भी कोई देवनिर्मित महापुरुष ही करेगा !तब तक सामान्य लोगों को इन भ्रष्ट दानवों से त्रस्त रहकर पीड़ा भोगनी ही पड़ेगी !
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