Wednesday, 30 December 2015

जब पांडव बनवास में रह रहे थे !तब युधिस्ठर ने मार्कण्डेय ऋषि से अपना दुःख व्यक्त करते हुए पूंछा था कि क्या हमलोगों से अधिक भाग्यहीन कोई व्यक्ति इस संसार में है ?हमलोग सत्यनिष्ठ और धर्मपर्याण जीवन जीते हुए घोर कष्ट प्रद बनवासी जीवन जी रहे हैं !और पापियों में प्रधान दुर्योधन भोग और ऐश्वर्य युक्त जीवन जी रहा है !शाश्त्रों में ऐसा वर्णन आता है कि मार्कण्डेय ऋषि की आयु लाखों वर्ष की है !उन्होंने युधिस्ठर से कहा कि कभी कभी अनीति से भी व्यक्ति धनसम्पत्ति और शक्ति ,वैभव ,कीर्ति ,पद प्रितिस्था प्राप्त करता है भोग भोगता है !किन्तु उसका जड़मूल से विनाश हो जाता है !उसके द्वारा किये गए पापों का फल उसके नाती पोते तक भोगते हैं !इसीलिए तुम शोाक मत करो दुःख तो भगवान राम और और अनेकों श्रेष्ठ पुरुषों को भोगना पड़ा था !तुम शीघ्र ही हस्तिनापुर का राज्य प्राप्त कर सारी पृथ्वी के सम्राट बनोगे और दुर्योधन मय अपने भाईओं और सहयोगी राजाओं के सहित विनाश को प्राप्त हो जाएगा !और यह हुआ भी !स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश में राजतंत्र और जमींदारी का विनाश हुआ !और जो परम्परा से पीढ़ियों से धनवान पुरुष थे उनमे से भी अधिकांश लुप्त हो गए हैं !उनके स्थान पर नए राजे महाराजे और धन्नासेठ उत्पन हो गए हैं !जिनकी जीवनशैली और रहन सहन और ठाठ बाट राजाओं ,महाराजाओं को भी भोग ऐश्वर्य में पराजित कर रहा है !अडानी ,अम्बानी आदि ऐसे ही उद्योग समूह हैं !जिनमे से कुछ देश की सेवा भी कर रहे हैं !और कुछ सत्ता के सहयोग और संरक्छण से ऐश्वर्य के आकाश में विचरण कर रहे हैं !उनकी संपत्ति दिन दूनी रात चौगनी हबा की गति से बृद्धि को प्राप्त हो रही है !दूसरी और देश में भयानक गरीवी है !और किसान आत्महत्या कर रहे हैं !अगर ये वर्तमान के लोकतंत्र में जन्मे राजे महाराजे अपनी ही संपत्ति और पारिवारिक समृद्धि में ही संलग्न और समर्पित रहते हैं !और पूर्व वर्ती राजाओं ,महाराजाओं और जमींदारों के विनाश को दृष्टिगत नहीं रखते है !अपने निकृष्ट और निहित स्वार्थों की पूर्ति में ही संलग्न रहते  हैं !तो फिर यह उसी इतिहास को दुहरा रहेहैं !

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