Saturday, 5 December 2015

भगवान बुद्ध और ब्राह्मण ------ आजकल कुछ लोग ब्राह्मणो के विरुद्ध अज्ञान के कारण बहुत असभ्य और अपमानजनक टिप्पड़ियां करते हैं ! बहुत से लोग यह समझते नहीं है ! कि धर्म परिवर्तन कराने  वाले धर्मो ने वैदिक धर्म के प्रति  अश्रद्धा उत्पन्न करने के लिए उनलोगों ने मनगढंत आरोप ब्राह्मणो पर लगाए ! इसी षड्यंत्र के शिकार आज  भी बिना सोचे समझे ब्राह्मणो को असभ्य और गन्दे अपमानजनक शव्दों से नबाजते  रहते हैं  !और झूठ की पराकाष्ठा तो जब हो जातीहै ! जब भगवान बुद्ध को भी ब्राह्मणो के विरुद्ध खड़ा कर देते  हैं ! बौद्ध धर्म का सर्व श्रेष्ठ और सर्वमान्य ग्रन्थ धम्मपद है !उसमे ब्राह्मण बग्गो नाम से एक अध्याय है जिसमे ब्राह्मणत्त्व  की महिमा और प्रसंगों में ४१ गाथाएं हैं ! उनमे से में सिर्फ एक दो गाथाओं का जिक्र यहां कर रहा हूँ अगर किसी को ब्राह्मणत्त्व  की महत्ता के सम्बन्ध में बुद्ध के विचारों की जानकारी करनी हो तो उसे उन सभी गाथाओं को ध्यान पूर्वक  पढ़ना चाहिए
गाथा ३८३------हे ब्राह्मण तृष्णा के श्रोत को छिन्न कर दे ! पराक्रम कर ! कामनाओं को दूर कर दे ! हे ब्राह्मण संस्कारों के छय कोजानकार तू निर्वाण का पात्र हो जा ! ------ श्राबस्ती में एक बहुत श्रद्धालु ब्राह्मण रहते थे ! उन्होंने एक दिन तथागत (बुद्ध )का उपदेश सुना ! उपदेश को सुनकर वह पवित्र ब्राह्मण नित्य सोलह भिक्छुओं को दान देने लगे ! जब भिक्छु उनके पास जाते थे ! तो वह अत्यंत आदर से भिक्छुओं से कहते थे ! आईये अरहंत लोग ! बेठिये अरहंत लोग ! मेरे यहां भोजन कीजिये ! (अरहंत सिद्ध भिक्छु को कहते हैं ! (!यह अत्यंत उच्च स्थितिहै )  एक दिन जब कोई भिक्छु उन ब्राह्मण देवता के यहाँ भोजन करने नहीं गया ! तब बे तथागत के पास गए और कहा आज कोई भी भिक्छु मेरे यहाँ भोजन करने नहीं आया ! यह सुनकर भगवान बुद्ध ने भिक्छुओं को बुलाकर भोजन न करने जाने का कारण पूंछा तो भिक्छुओं ने कहा यह ब्राह्मण हमको अर्हन्त कहते हैं ! जिस से हमको संकोच होता है ! तब भगवान ने कहा यह ब्राह्मण श्रद्धा से अर्हन्त कहते हैं ! श्रद्धा से कहने में तुम्हें संकोच नहीं करना चाहिए ! चूँकि ब्राह्मणो को अर्हन्तो से अधिक प्रेम है ! इसके लिए तुम्हे भी तृष्णा  के श्रोतों को काट कर अर्हन्तत्व की प्राप्तिकरनी चाहिए ! ऐसा कहकर भगवान बुद्ध ने इस गाथा को सुनाया था !इस गाथा को सुन ने के बाद जो अनावश्यक रूप से मनगढंत  आधारों को अपनी कल्पना में संजोकर ब्राह्मणो को घमंडी और बुद्ध धर्म का दुश्मन बताते रहते हैं !और ब्राह्मणो को मुफ्त का भोजन करने वाला निरूपित करते रहते हैं !उनको अपना अज्ञान और मूढ़ता निबृत्त कर लेनी चाहिए !इसके बाद भी अगर ये लोग सुधरने को तैयार नहीं होते हैं !तो फिर हम यही समझेंगे कि ये अपने स्वभाव से ही ब्राह्मण विरोधी हैं !

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