Thursday, 31 March 2016

प्रतिभा अमावस्या की गहन काली रात्रि में भी बिना पूर्णिमा के भी प्रकाशित हो जाती है !जो समय के साथ प्रकाशित होते हैं और ख्याति तथा महत्ता प्राप्त करते हैं बे समय के बाद अज्ञात होकर दफ़न हो जाते हैं !भारत का  श्रेष्ठ तत्तवज्ञान उपनिषदों में व्यक्त हुआ है !किन्तु जिन ऋषियों को तत्त्व दर्शन हुआ उन्होंने अपने नाम प्रकाशित नहीं किये हैं !जितना गम्भीर और महत्त्व पूर्ण कालजयी ज्ञान आज  भारत में है उसके प्रकाशक बे ऋषि हुए हैं जिन्होंने अपने नाम और चित्रों को प्रकाशित नहीं होने दिया !पदमश्री से अलंकृत ये ककछा तीन तक विद्या प्राप्त ऐसे ही व्यक्ति हैं जिन्होंने नाम के लिए काम नहीं किया बल्कि काम से इनका नाम स्वतः प्रकाशित हो गया !पुरुष्कार पाने वालों की इस भारी भीड़ में इन नाग महोदय को बिना किसी प्रयत्न के चुन गया यह उत्तम प्रक्रिया है !ऐसे बहुत से ज्ञात अज्ञात विद्वान भारत में है जो पुरुष्कार प्राप्त के योग्य हैं किन्तु बे पुरुष्कार प्राप्त करने का प्रयत्न नहीं करते हैं बल्कि उदासीन रहते हैं !यह अच्छी शुरुआत है !इसको जारी रहना चाहिए !

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