मामला चाहे गाय बध को प्रतिबंधित करने का हो ! या योग की शिक्छा देने का
हो ! या विद्यालयों में सूर्य नमस्कार को जरुरी बनाने का हो ! इस सबको
साम्प्रदायिक दृष्टि से क्योँ देख कर विरोध किया जाता है? !दूध दही घी
मक्खन पनीर खोवा आदि जिसका प्रयोग माशाहारी शाकाहारी सभी करते हैं और
बच्चों से लेकर ब्रद्ध पुरुषों तक को स्वास्थ्य की दृष्टि से जिसकी महती
आवश्यकता है ! उसकी आवश्यकता की पूर्ति कहाँ से होगी? अगर दूध देने वाले
पशुओं को मार कर खा लिया जायेगा ?गाय के दूध की उपयोगिता स्वास्थ्य
की दृष्टि से विज्ञानं ने सिद्ध की है !इसी प्रकार योग और सूर्य नमस्कार
शारीरिक और मानसिक शक्ति तथा दीर्घ जीवन प्रदान कराने वाली क्रियाएँ है
!इनको साम्प्रदायिक दृष्टि से देखने वालों को इन क्रियायों के समानांतर अगर
कोई और क्रियायों का ज्ञान हो तो उनको प्रस्तुत करना चाहिए ! बेमतलब विरोध
से बचना चाहिए !धर्मनिरपेक्छ्ता का अर्थ यह नहीं है की भारत को अपनी पूर्व
प्रचलित समाज और राष्ट्र को उन्नति चरित्र और स्वास्थ्य प्रदान करने वाली
पद्धतिओं को लागू नहीं करना चाहिए !
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