तरुण विजय का लेख बलिदान याद रखने का फर्ज भारतीयोँ का ध्यान जम्मुकश्मीर
में होने वाले सैनिकोँ द्वारा देश की सुरक्षा के लिए कठोर कर्तव्य पालन और
जीवन बलिदान की और ध्यान अकृषित करता है तथा देश हित में जीवन बलिदान करने
वाले सैनिकों की निष्ठां पर समय समय बेतुके बेमतलब की गयी आलोचनाओ का उत्तर
भी देता है जम्मू कश्मी भारत का अभिन्न अंग है इसका ढोल १९४७ से ही पीटा
जाता रहा है किन्तु इसके बाद भी कश्मीर में भारत विरोधी गतिविधियाँ चरम
पंथिओं द्वारा लगातार होती रहती है पाकिस्तान जिंदाबाद के
नारे लगाये जाते हैं मंदिरों को तोड़ा जाता है कश्मीरी पंडितों को बेवतन कर
दिया जाता है चरम पंथी संगठनो के नेताओं से बातचीत की जाती है अलगाओ वादी
हर भारत पाक चर्चा में शामिल किये जाते हैं कश्मीर पर भारत सरकार अपने बजट
का बड़ा हिस्सा खर्च करती है कश्मीर घाटी में चर्म पंथी पूरी तरह से
पाकिस्तान के समर्थन में खड़े दिखाई देते हैं कोई भी कश्मीर जाने वाला
व्यक्ति यह सब देख सकता है चप्पे चप्पे पर सैनिक तैनात दिखाई देते हैं जो
कश्मीर का हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में हैं उसकी मुक्ति की चर्चा नहीं
होती है जो हिंदुस्तान का हिस्सा है वार्ता उसी पर केंद्रित रहती है यह सब
क्योँ होता है? इसका कारण सामान्य जन नहीं समझ सकता है किन्तु जब यह
सरकारी स्तर पर कहा जाता है की कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है तब फिर अलगाओ
बादिओं या पाकिस्तान से इस सम्बन्ध में बात चीत क्योँ होती है? यह बात
परेशानी में आम आदमी को डालने वाली होती है ?जम्मू कश्मीर वैदिक संस्कृति
का प्रमुख केंद्र अनादि कल से रहा है यह ऋषिओं की तपस्या की भूमि रही है
इस भूमि पर अनेकों ऋषिओं के साधना स्थल और साधना केंद्र है जगद गुरु
शंकराचार्य का तपस्या स्थल वैष्णव देवी अमरनाथ आदि स्थल आज भी हिन्दुओं
के तीर्थस्थल है इसके अलावा भी हजारों प्रगट और गुप्त ऋषिओं के साधना
केंद्र है बहुत से हिन्दू मंदिर मुसलमानो ने या तो बंद करा दिए हैं उन पर
कब्ज़ा कर लिया है हिन्दू इसका प्रितििकार नहीं कर पाता है चरमपंथ दूसरे
धर्मों को विशेषतौर पर हिन्दू धर्म को स्वीकार नहीं करता है पाकिस्तान और
बांग्लादेश जो विभाजन के पहले हिंदुस्तान था आज लगभग इस्लामिस्तान बन गया
है हिन्दू आबादी वहां लगभग समाप्त होती जारही है और मंदिर भी नष्ट नाबूद हो
रहे हैं हम कुछ भी राग अलापते रहे हैं और गंगा जमुनी संस्कृति की गुण गान
करते रहें किन्तु हिन्दू मुस्लिम एकता अब भी स्वप्न ही है और इन में दंगे
आज भी होते रहते हैं अगर कश्मीर का छोटा सा भी हिस्सा पाकिस्तान को सौंपा
दिया जाता है तो यह ग़द्दारी होगी और हिन्दू संस्कृति के विनाश का एक नया
विध्वंसक कदम होगा -----नरोत्तम स्वामी जिला अध्यक्छ लोकतंत्र सेनानी समिति
झाँसी mo9451937919
No comments:
Post a Comment